20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

9 साल के बच्चे ने चलाया आंदोलन, आज संभाल रहे MP की सत्ता

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जन्म दिवस के मौके पर mp.patrika.com बताने जा रहा है उनके बचपन से लेकर अब तक के दिलचस्प किस्से...।

4 min read
Google source verification

image

Manish Geete

Mar 05, 2016

Shivraj Singh Chauhan history,chief,minister, shiv

Shivraj Singh Chauhan history,chief,minister, shivraj photos,shivraj vidoes, Shivraj Singh Chauhan,Shivraj,latest news shivraj singh chauhan,biography of shivraj singh chauhan,Singh,Chauhan,shivraj singh chauhan contact number,Shivraj Singh Chouhan e

(MP के CM शिवराज सिंह चौहान का जन्म दिन 5 मार्च को है। वे लगातार दस साल से भी अधिक समय से मुख्यमंत्री बने हुए हैं। mp.patrika.com उनके जन्म दिवस के मौके पर CM शिवराज के बचपन से लेकर अब तक के दिलचस्प किस्से बताने जा रहा है..।)

भोपाल। शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री बनने का सफर 9 साल की उम्र से ही शुरू हो गया था, जब इस बच्चे ने अपने ही गांव में मजदूरों का मेहनताना दोगुना करवाने के लिए आंदोलन चलाया था। उस समय आंदोलन की इस आग ने सभी मजदूरों को एकजुट कर दिया था और सभी ने हड़ताल करके अपना हक मांगना शुरू कर दिया। तब कई मजदूरों ने बोला था कि यह बच्चा बड़ा होकर नाम कमाएगा। उनकी बातें सच हुई और वह 9 साल का बच्चा अब मुख्यमंत्री बनकरअपने कार्यकाल के 10 साल पूरे कर रहा है।

चाचा की पिटाई नहीं भूले शिवराज
विभिन्न कार्यक्रमों में शिवराज सिंह खुद ही दिलचस्प किस्से बताते हैं। उन्होंने एक बार बताया था कि जब वे 9-10 साल के थे, तब नर्मदा के तट पर एक दिन बूढ़े बाबा के चबूतरे पर उन्होंने ग्रामीण मजदूरों को एकत्र किया और उनसे बोले- दो गुना मजदूरी मिलने तक काम बंद कर दो। मजदूरों का जुलूस लेकर शिवराज नारे लगाते हुए सारे गांव में घूमे। जैत गांव में 20-25 मजदूरों के साथ एक बच्चा नारे लगाते घूम रहा था, मजदूरों का शोषण बंद करो , ढाई पाई नहीं-पांच पाई दो।

घर लौटे तो चाचा आग-बबूला हो रहे थे, क्योंकि शिवराज के भड़काने से परिवार के मजदूरों ने भी हड़ताल कर दी थी। शिवराज की पिटाई करते हुए उन्हें पशुओं के बाड़े में ले गए और डांटते हुए बोले- अब तुम इन पशुओं का गोबर उठाओ, इन्हें चारा डालो, जंगल ले जाओ। शिवराज ने ये सब काम पूरी लगन से किया पर मजदूरों को तब तक काम पर नहीं आने दिया, जब तक सारे गांव ने उनकी मजदूरी नहीं बढ़ा दी।


shivraj singh chauhan birthday


जैत से आ गए भोपाल
उन दिनों देश की युवा शक्ति को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जोडऩे का अभियान चल रहा था। शिवराज सिंह विद्यार्थी परिषद के सदस्य बने। फिर उन्हें मॉडल हायर सेकंडरी स्कूल भोपाल के छात्र संघ के चुनाव में लडऩे का मौका मिला। सन् 1975 में 16 वर्ष के इस किशोर को छात्र संघ का अध्यक्ष चुन लिया गया। लगातार संघर्ष करते-करते वे एक प्रखर और मुखर छात्र नेता के रूप में उभरे।धारदार और धारा प्रवाह भाषण देने की शैली बचपन से ही आ गई थी। उसी शैली ने लोकप्रियता भी दिलाई। वे राष्ट्रीय मुददों पर भी छात्र-छात्राओं के बीच ओजस्वी वाक् कला के लिए जाने जाते थे।


एक वोट और एक नोट से बने स्टार प्रचारक
1990 में शिवराज को भाजपा संगठन ने बुधनी से चुनाव लडऩे को कहा गया। इससे पहले शिवराज 13 सालों तक पार्टी के लिए लोकसभा, विधानसभा के अलावा स्थानीय चुनावों में धुआंधार प्रचार कर चुके थे। प्रचार के दौरान शिवराज ग्रामीणों से मिले भोजन पर ही निर्भर थे। शिवराज सिंह ने मतदाताओं से एक वोट और एक नोट मांगा। इस नारे ने उन्हें स्टार बना दिया।

shivraj singh chauhan birthday

ऐसे तय हुआ मुख्यमंत्री बनने का सफर
2005 में शिवराज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। चौहान को 29 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। तेरहवीं विधानसभा के निर्वाचन में चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक की भूमिका निभाई। चौहान को 10 दिसंबर 2008 को भारतीय जनता पार्टी के 143 सदस्यीय विधायक दल ने सर्वसम्मति से नेता चुना गया। उन्होंने 12 दिसंबर 2008 को भोपाल के जंबूरी मैदान में एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई।



पांच बार विदिशा सांसद रहे शिवराज
चौहान 1990 में पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद बने। ग्यारहवीं लोक सभा में वर्ष 1996 में शिवराज सिंह विदिशा संसदीय क्षेत्र से पुन: सांसद चुने गए। चौहान 1998 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार बारहवीं लोक सभा के लिए सांसद चुने गए। शिवराज सिंह 1999 में विदिशा से ही चौथी बार तेरहवीं लोक सभा के लिए सांसद निर्वाचित हुए। सन 2000 से 2003 तक शिवराज सिंह भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। चौहान 2000 से 2004 तक संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे। शिवराज सिंह पॉचवी बार विदिशा से चौदहवीं लोक सभा के सदस्य निर्वाचित हुए। उन्हें वर्ष 2005 में भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ये भी पढ़ें

image


शिवराज के गुरु हैं सुंदरलाल पटवा
शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक गुरू और पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा कहते हैं कि शिवराज का व्यक्तित्व दक्ष प्रशासक का है। जिसे विरासत में बीमारू मध्यप्रदेश मिला। अनुभवहीन प्रशासक की आशंकां थीं। लेकिन, शिवराज ने दिन के 20 से 22 घंटे लगातार काम करके योग्य प्रशासकों की टीम खड़ी कर ली। प्रदेश में विकास की उपलब्धियों का नया इतिहास रच डाला।

संबंधित खबरें



दर्शनशास्त्र में गोल्डमेडलिस्ट हैं CM
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर किया और स्वर्ण पदक के साथ शिक्षा प्राप्त की। 1975 में मॉडल हायर सेकंडरी स्कूल में पढ़ाई की और छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर राजनीति में कदम रखा। आपात काल का विरोध और 1976-77 में भोपाल जेल में बंद होने के बाद वे चर्चाओं में आने लगे। लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन करने लगे और कई बार जेल गए। 1977 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं। 1992 में उनका विवाह साधना सिंह के साथ हुआ। उनके दो पुत्र कार्तिकेय और कुणाल हैं।



ये भी पढ़ें

image