
गर्मियों में ठंडा पानी पीना हो सकता है खतरनाक, जानिए इसके 4 बड़े नुकसान
भोपालः गर्मियों के दिनो में शरीर का वॉटर लेवल सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा तेजी से कम होता है। ऐसे में खासकर दिन के समय तेज धूप से घर लौटने पर तेज प्यास लगी होती है। ऐसे में इंसान ज्यादातर ठंडा पानी पीना पसंद करता है। कई लोग तो गर्मियों के दिनों में फ्रीज़र में रखा बर्फ का पानी तक पी लेते हैं। या बाहर धूप में देर तक रहने पर बर्फ वाला जूस और कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं। अगर आप भी ज्यादा ठंडा या बर्फ का पानी पीना पसंद करते हैं, तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है, क्योंकि इसके कई नुकसान हैं। तेज धूप में चलने या घूमने पर खासकर गर्मी के मौसम में घूमने पर प्यास लगना स्वाभाविक है।
बर्फ वाला पानी या जूस, कोल्डड्रिंक पीकर आप स्थाई राहत तो पा सकते हैं, लेकिन ये शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। आइये जानते हैं ज्यादा ठंडा पानी पीने से होने वाले नुकसान के बारे में...।
-बढ़ती है आलस और थकान
ज्यादा ठंडा पानी पीने से व्यक्ति को आलस और थकान बढ़ती है। क्योंकि, सामान्य तौर पर शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रहता है, जबकि ठंडे पानी का तापमान बहुत अधिक कम होता है। ऐसे में ठंडा पानी पीने के बाद शरीर में तापमान का सही स्तर बनाए रखने के लिए शरीर को ढेर सारी ऊर्जा बिना वजह खर्च करनी पड़ती है। इस कारण ठंडा पानी पीने के बाद आपको थकान और आलस बढ़ जाती है।
-दिल को पहुंचाता है नुकसान
ज्यादा ठंडा पानी पीना आपके दिल के लिए नुकसानदायक साबत हो सकता है। ये पानी शरीर में वैगस नर्व्स को उत्तेजित करता है, जिससे दिल की धड़कन असामान्य गति से दौड़ने लगती है। वैगस नर्व्स शरीर में अनैच्छिक क्रियाओं के लिए जिम्मेदार होती है, जो दिल से जुड़ी खास नर्व मानी जाती है। साथ ही, रक्त वाहिनियों के सिकुड़ने से भी कई बार ब्लड का फ्लो बिगड़ जाता है।
-पाचन तंत्र की खराबी
ज्यादा ठंडा पानी पीने से आपका पाचन तंत्र भी खराब हो सकता है। खाने के तुरंत बाद पाचन की क्रिया शुरू हो जाती है, जो आमतौर पर दो-तीन घंटे तक चलती रहती है। ऐसे में अगर आप बहुत ठंडा पानी पी लेते हैं, तो इससे रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं, जो पाचन क्रिया को कमजोर करती हैं। फिर धीरे धीरे आपको अपच की समस्या होने लगती है।
-हो सकती है गले की खराश
ज्यादा ठंडा पानी पीने के बाद मुंह के अंदर जिन-जिन भागों को छूकर गुजरता है, उनकी कोशिकाओं और रक्त वाहिनियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। इससे रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं। इसके अलावा ये आपके रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की नाजुक सुरक्षा परत को भी नष्ट कर सकता है, जिससे गले का इंफेक्शन यानी संक्रमण हो सकता है। इससे गले में खराश, टॉन्सिल या जुकाम की समस्या हो सकती है।
Published on:
08 May 2019 03:33 pm
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