अस्पताल पार्किंग में पड़ी थी कोरोना मरीज की लाश, कलेक्टर ने दिये जांच के आदेश, CCTV भी आया सामने

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होकर खुद मृतक के बेटे के पास पहुंची तब कहीं जाकर परिवार को उनके पिता के शव के साथ हुए इस दुर्व्यव्हार की जानकारी लगी। अब घटना का CCTV फुटेज भी सामने आ गया है। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने दिये जांच के आदेश।

By: Faiz

Published: 07 Jul 2020, 11:51 PM IST

भोपाल/ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में दो अस्पतालों के बीच उलझकर सोमवार को एक कोरोना पेशेंट की जान चली गई। राजभवन के अति सुरक्षित इलाके में स्थित पीपुल्स अस्पताल के सामने दो घंटे तक कोरोना मरीज का शव पड़ा रहा, पर किसी जिम्मेदार को इसपर सुध लेना गवारा नहीं था। जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होकर खुद मृतक के बेटे के पास पहुंची तब कहीं जाकर परिवार को उनके पिता के शव के साथ हुए इस दुर्व्यव्हार की जानकारी लगी। हालांकि, मंगलवार शाम को घटना का CCTV फुटेज भी सामने आ गाया। मामले पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर अविनाश लवानिया ने मजिट्रियल जांच के आदेश दे दिये हैं।

 

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कलेक्टर ने दिये मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

कलेक्टर अविनाश लवानिया ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर एडीएम उत्तर सतीश कुमार को जांच सौंपी है। जांच के लिए छह बिंदू तय किए गए हैं, जिनके इर्द गिर्द पूरी जांच होगी। इसके बाद एडीएम कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।


इन 6 बिंदुओं पर आधारित होगी जांच

1. मरीज 23 जून से हॉस्पिटल में भर्ती था तो ऐसी कौन सी परिस्थिति पैदा हुई कि उसे अन्य अस्पताल में रैफर करने का निर्णय किया गया।
2. क्या अन्य अस्पताल में रैफर करने से पूर्व रोगी के परिवार को मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी दी गई। मरीज की शिफ्टिंग के लिए परिवार की सहमति ली गई।
3. क्या मरीज को शिफ्ट करते समय ऐसे रैफर और ट्रांसफर करने के हेतु समय-समय पर जारी नियमों और प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
4. किन कारणों से मरीज को एम्बुलेंस से वापस लाने की स्थिति पैदा हुई थी।
5. किन परिस्थितियों में रोगी की मृत्यु हुई, क्या इसके लिए कोई जिम्मेदार है?
6. जांच के दौरान अन्य बिंदू जो दृष्टिगत हों?

 

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किडनी के इलाज के लिए 13 दिन पहले पीपुल्स में भर्ती हुआ था मरीज

बिजली कंपनी के लाइन इंस्पेक्टर 59 वर्षीय वाजिद अली पीपुल्स हाईटेक हॉस्पिटल मालवीय नगर में 13 दिन पहले किडनी के इलाज के लिए भर्ती हुए थे। इलाज के दौरान हुई जांच में उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई, जिसके बाद चिरायु अस्पताल से उन्हें एंबुलेंस लेने आ गई। चिरायु जाते समय एंबुलेंस में तबियत ज्यादा बिगड़ने पर ड्राइवर उन्हें वापस पीपुल्स अस्पताल ले आया। यहां पीपुल्स अस्पताल ने मरीज को दोबारा भर्ती करने से मना कर दिया। हद तो तब हो गई, जब एंबुलेंस ड्राइवर भी पेशेंट को गंभीर हालत में पीपुल्स अस्पताल की पार्किंग में जमीन पर पटककर चला गया। यहां मरीज ने दम तोड़ दिया। मामला संज्ञान में आने के बाद पीपुल्स अस्पताल के दो कर्मचारी पीपीई किट पहनकर आए, उनके पास ऑक्सीजन किट और स्टेंचर भी था। उन्हें स्ट्रेचर पर लेटाया। सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन तब तक वाजिद अली की सांसें टूट चुकी थीं।

 

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बेटा बोला- सभी ने हमें गुमराह किया

मृतक के बेटे आबिद अली ने बताया कि, मैं पीपुल्स में बिल का भुगतान कर अम्मी के साथ घर चला गया था। एम्बुलेंस में साथ जाना चाहते थे, लेकिन हमें नहीं जाने दिया गया। जब उन्हें वापस लाने की खबर मिली तो फिर पीपुल्स हॉस्पिटल पहुंचे। वहां से भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि उनके पिता को कहां लेकर गए हैं। इसके बाद वे हमीदिया पहुंचे, लेकिन वहां भी उनके पिता नहीं मिले। इसके बाद चिरायु पहुंचे। वहां पता चला कि पिता का इंतकाल हो गया है। कहा गया कि अस्पताल वाले ही उन्हें सुपुर्दे खाक करेंगे। हमें आखिरी बार उन्हें देखने तक नहीं दिया गया। जब चिरायु की एंबुलेंस उनके पिता को लेकर गई थी, तो वापस क्यों आई?

 

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पीपुल्स हॉस्पिटल ने नहीं किया भर्ती

चिरायु हॉस्पिटल के डायरेक्टर और डाॅ. अजय गोयनका का कहना है कि, मेरे ड्राइवर ने बहुत अच्छा काम किया, उसे लगा कि, वो मरीज के साथ बैरागढ़ भी क्रास नहीं कर पाएगा। मरीज को इंक्यूबेट करने की जरूरत लगी तो रास्ते से पीपुल्स को जानकारी दे दी गई। लेकिन उन्होंने मरीज को लेने से इंकार कर दिया। पीपुल्स हॉस्पिटल वाले अपनी लापरवाही को छिपा रहे हैं।


मरीज को हॉस्पिटल के बाहर पटककर भाग गयी एंबुलेंस

वहीं, पीपुल्स हाईटेक हॉस्पिटल के चीफ मैनेजर उदय दीक्षित का कहना है कि, हमारे हॉस्पिटल में कोविड-19 का इलाज होता ही नहीं है। चिरायु की एंबुलेंस बीच रास्ते से लौट आई। हो सकता है रास्ते में ही मरीज की जान चली गई हो। हमने एफआईआर करने को कहा है। हमारे पास रिकाॅर्डिंग है कि एंबुलेंस वाला पार्किंग एरिया में उन्हें छोड़कर चला गया। उन्होंने कहा कि, हमारे पास इस बात के भी प्रमाण है कि, एंबुलेंस में ऑक्सीजन तक नहीं था।

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इस तरह चला घटनाक्रम

23 जून को वाजिद अली पीपुल्स हाईटेक हॉस्पिटल में किडनी के इलाज में भर्ती हुए। 4 जुलाई को कोरोना जांच के लिए सैंपल जेपी अस्पताल भेजा, लेकिन देरी होने से मना कर दिया गया। 5 जुलाई की सुबह सैंपल बंसल हॉस्पिटल भेजा गया। 6 जुलाई सुबह 9.30 बजे रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि हुई। शाम 6:25 बजे चिरायु की एम्बुलेंस मरीज को लेकर रवाना हो गई। 6:35 बजे ड्राइवर ने फोन किया कि मरीज को वापस ला रहा है। 7 बजे एम्बुलेंस अस्पताल पहुंचीं, लेकिन यहां पीपुल्स ने मरीज को भर्ती करने से इंकार कर दिया।7:25 बजे ड्राइवर मरीज को पार्किंग एरिया में पटककर चला गया। 7:45 बजे पीपुल्स के स्टाफ ने मरीज को सीपीआर देने की कोशिश की तब तक मरीज की जान जा चुकी थी।रात 8:30 बजे चिरायु की दूसरी एंबुलेंस आई और शव लेकर गई।

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