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दफ्तर में लचककर चलता है और सड़क पर फर्राटे भरता है कैलाश

आयुक्त नि:शक्तजन के सामने पहुंचे दिव्यांगों ने की शिकायत, हमारे हक पर डाका डाल रहे फर्जी दिव्यांग

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Divyang

World Disability Day: It is seen responsible for the pain of Divyang

भोपाल. सर, हम दिव्यांग होकर भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं, वहीं कुछ लोग फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाकर नौकरियां कर रहे हैं। सिवनी तहसील कार्यालय में कैलाश नामक व्यक्ति दफ्तर में दिव्यांगता दिखाने के लिए लचक कर चलता है। कार्यालय से निकलते ही सड़क और बाजार में फर्राटे भरता है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि वास्तविक दिव्यांगों को उनका हक मिल सके। यह शिकायत इंदर सिंह ने आयुक्त नि:शक्तजन से की है।

सहायक संचालक आरबी सेमिल ने बताया कि स्पेशल बेंच के दौरान सुनवाई की गई, जिसमें अधिकतर केस फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र से संबंधित रहे। आयुक्त ने सुनवाई करते हुए कलेक्टर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को मामलों की जांच कर प्रतिवेदन पेश करने के निर्देश दिए हैं।

इंदर सिंह ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान कैलाश एनसीसी में था। स्कूल में आयोजित होने वाली कबड्डी, क्रिकेट और हॉकी जैसे खेलों में वह बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता था। पढ़ाई के बाद वह सिवनी तहसील में लचकते हुए चलते दिखा, लेकिन सार्वजनिक स्थानों में फर्राटे भर रहा था।

महिला दिव्यांग ने शिकायती-पत्र में आरोप लगाया कि पन्ना स्थित एनएमडीसी कार्यालय में बीते दिनों दिव्यांग कोटे में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी का विज्ञापन जारी हुआ था। इसके लिए उसके साथ कई अन्य दिव्यांग महिलाओं ने भी आवेदन किया था।

अधिकारियों की साठ-गांठ से उस महिला को नौकरी में रख लिया गया, जो दिव्यांग नहीं है। कुछ दिनों बाद पता चला कि जिस महिला को नौकरी मिली है, वह उसी कार्यालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी की करीबी रिश्तेदार है, जिसने फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाकर नौकरी दी है।

एक अन्य शिकायतकर्ता दिव्यांग सुरेश ने बताया कि जिला उद्योग केंद्र की ओर से दिव्यांगजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए लोन दिया जाता है। दिव्यांगजन कोटे से मिलने वाली सहायता का फायदा एेसे लोग ले रहे हैं, जो दिव्यांग नहीं हैं। फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र लगाकर वह लोग व्यवसायिक लोन ले रहे हैं।

40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग व्यक्ति उस कोटे के तहत शासकीय सुविधाओं का हकदार होता है। सरकारी विभाग और योजनाओं का लाभ लेने के लिए दिव्यांग प्रमाण-पत्र होना आवश्यक होता है। प्रमाण-पत्र तहसील कार्यालय द्वारा बनाया जाता है। यह जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा सत्यापित किया जाता है कि व्यक्ति कितने प्रतिशत दिव्यांग है। शासकीय विभाग में नौकरी के दौरान जांच समिति गठित की जाती है, जो आवेदकों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच करती है।

सहायक संचालक आरबी सेमिल ने कहा कि हमारा हर संभाव प्रयास रहता है कि दिव्यांगजनों की शिकायतों का तत्काल निराकरण कर उनको मदद उपलब्ध कराई जाए। सुनवाई में प्राप्त ज्यादातर शिकायतें फर्जी दिव्यांगों के बारे में हैं। उनकी जांच के निर्देंश आयुक्त द्वारा दिए गए हैं।