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बर्खास्तगी के बाद 13 साल से घर में थे पिता, वर्ल्ड चेंपियन क्रिकेटर बेटी ने फिर लगवा दी सरकारी नौकरी

Kranti Gaud- क्रिकेटर बेटी का कमाल, क्रांति गौड के पिता को फिर पुलिस सेवा में रखा, सीएम मोहन यादव ने निभाया वादा

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Kranti Goud

भारतीय खिलाड़ी क्रांति गौड़। (फोटो सोर्स: एक्‍स@/BCCIwomen)

Kranti gaud- भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले साल वर्ल्ड चैंपियन बनी थी। इंडियन टीम ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पूरे देश को जश्न में डुबो दिया था। इस जीत के बाद महिला क्रिकेटरों का मानो पूरा जीवन ही बदल गया। विश्व चैंपियन भारतीय महिला क्रिकेट टीम में एमपी की क्रिकेटर क्रांति गौड़ भी शामिल थीं। सीएम मोहन यादव ने उन्हें इस उपलब्धि पर सम्मानित किया और पुरुस्कारस्वरूप 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। कार्यक्रम में क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने सीएम से पुलिस सेवा से बर्खास्त अपने पिता को दोबारा नौकरी देने का आग्रह किया था। सीएम मोहन यादव ने इसका वादा किया और अब इसे निभा भी दिया है।

वर्ल्ड चेंपियन क्रिकेटर क्रांति गौड़ मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के घुवारा गांव की रहनेवाली है। वह बेहद तेज गेंदबाजी करती है। वर्ल्ड कप जीतने के बाद क्रांति गौड़ को सम्मानित करने के लिए राजधानी में मुख्यमंत्री निवास पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां उनके माता पिता और कोच को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने खासतौर पर अपने पिता मुन्ना सिंह को सीएम मोहन यादव से मिलवाया। उन्होंने सीएम के समक्ष अपनी उपलब्धियों में पिता के संघर्ष और योगदान का जिक्र किया। क्रांति गौड़ ने सीएम मोहन यादव से अपने पिता को दोबारा पुलिस सेवा में बहाल करने का आग्रह किया। मुन्ना सिंह पहले आरक्षक थे लेकिन सन 2012 में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था। क्रिकेटर क्रांति गौड़ द्वारा अपने पिता को पुन: सेवा का मौका देने का आग्रह स्वीकारते हुए सीएम मोहन यादव ने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा की।

अब पुलिस विभाग ने आरक्षक मुन्ना सिंह को सेवा में बहाल कर दिया है। वे दोबारा मध्यप्रदेश पुलिस में काम कर सकेंगे।
पुलिस मुख्यालय ने मुन्ना सिंह की पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं।

नो वर्क, नो पे के सिद्धांत पर दोबारा नौकरी

सीएम मोहन यादव द्वारा वादा कर लेने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मुन्ना सिंह को दोबारा नौकरी पर रखने की राह तलाशी। नियमों का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद मुन्ना सिंह को नो वर्क, नो पे के सिद्धांत पर दोबारा नौकरी पर रखने का आदेश जारी कर दिया गया।

आरक्षक मुन्ना सिंह पर 2011 में चुनावी ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे थे

बता दें कि आरक्षक मुन्ना सिंह पर 2011 में चुनावी ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे थे। शिकायतों की जांच के बाद 29 फरवरी 2012 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुन्ना सिंह को 8 जून 2012 से 5 जनवरी 2026 तक वेतन नहीं दिया जाएगा। नो वर्क, नो पे के सिद्धांत के आधार पर उन्हें करीब 13 साल का वेतन नहीं मिलेगा।