
मध्यप्रदेश में कांग्रेस 'पीके' को आजमाने की तैयारी.. देखें क्या है यह 'पीके'?
भोपाल। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की कामयाबी की पटकथा लिखने वाले प्रशांत किशोर यानी पीके मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खैवइया बन सकते हैं। कमलनाथ और उनकी टीम प्रशांत किशोर को जिम्मेदारी सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह जिम्मेदारी विधानसभा चुनाव से छह महीने पहले दी जा सकती है। इस संबंध में राहुल गांधी ही फैसला करेंगे।
कौन हैं ‘पीके’
प्रशांत किशोर के पास काम करने के लिए संसाधनों से लैस पूरी टीम है। प्रचार अभियान के लिए पीके की टीम नए आइडिया और तकनीक पर काम करती है। किसी भी पार्टी के लिए काम की शुरुआत करने के साथ ही पीके राजनीतिक फैसलों में मशविरा तो देते ही हैं, साथ ही पार्टी की चुनावी रणनीति, प्रबंधन, चुनाव के लिए चेहरे चुनने, नारे गढऩे, मुद्दे उठाने से लेकर सोशल मीडिया तक सारा कामकाज उनकी निगरानी में होता है। भाजपा के माइक्रो मैनेजमेंट के मुकाबले टीम बनाकर किस तरह काम करना है, ये भी पीके की रणनीति में शामिल है।
चाय पर चर्चा था पीके का आइडिया
नरेंद्र मोदी को चायवाले के तौर पर पेश करने की रणनीति ने 2014 में भाजपा को सफलता दिलाई। प्रशांत किशोर ही वो शख्स हैं, जिन्होंने चाय पर चर्चा और थ्रीडी सभाओं जैसे चुनावी तरीकों से मोदी के अभियान को जन-जन तक पहुंचा दिया। जुबान पर चढऩे वाले नारे गढऩा, जैसे-अबकी बार, मोदी सरकार या फिर बिहार में बहार है, नीतीश कुमार है उनके ही दिमाग की उपज हैं। नरेंद्र मोदी को चायवाले के तौर पर पेश करने की रणनीति ने 2014 में भाजपा को सफलता दिलाई।
प्रशांत किशोर चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा नाम माना जाता है, मध्यप्रदेश में वो कांग्रेस के लिए कितने उपयोगी साबित हो सकते हैं या उनकी सेवाओं का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। इस पर विचार किया जा रहा है।
-मानक अग्रवाल, प्रदेश प्रभारी, मीडिया विभाग, कांग्रेस
Published on:
28 May 2018 06:58 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
