
भोपाल@दीपेश अवस्थी की रिपोर्ट...
मध्यप्रदेश में होने वाले चुनावों को देखते हुए भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। इसी के चलते दोनों लगातार एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रही हैं।
वहीं इसी बीच जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए भाजपा को मात देने का मन बना लिया है।
इसके तहत कांग्रेसी भी अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सुझाव के अनुसार भाजपा नेताओं को एक निश्चित सीमा में बांधने के प्रयास में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा कांग्रेसी नेताओं को उन्हीं के घर में घेरने की रणनीति पर कांग्रेस ने भी अमल करना शुरू कर दिया है।
इसी बीच सोमवार को कांग्रेस की ओर से एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें उन्होंने 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुई हिंसक झड़पों के लिए भाजपा व उसके सहयोगी संगठनों को दोषी बताया है।
दरअसल सोमवार को कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने यह कांफ्रेंस की। इस दौरान उनके साथ प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा भी मौजूद रहे।
यहां उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति एक्ट में किए गए बदलाव के विरोध में दलित वर्ग द्वारा आयोजित 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान ग्वालियर चंबल क्षेत्र में हुई हिंसा पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सद्भावना समिति का गठन किया था।
इस सद्भावना समिति के संयोजक पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ही थे। समिति में चौधरी के अलावा अन्य विधायक और पदाधिकारी शामिल रहे। समिति के अध्यक्ष के नाते सुरेंद्र चौधरी ने आज जांच रिपोर्ट मीडिया के सामने पेश की।
उन्होंने कहा कि समिति ने जांच में पाया कि हिंसक घटनाओं के पीछे RSS भाजपा और उससे जुड़े संगठन शामिल थे।
उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल को दलित वर्ग द्वारा भारत बंद की घोषणा के पूर्व 30 मार्च को ग्वालियर चंबल संभाग में रैली निकालकर प्रशासन को आगाह किया था, लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने घटना को लेकर श्वेतपत्र की मांग की है।
Published on:
16 Apr 2018 01:41 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
