
सिंधिया का 'मिशन दिल्ली', दिग्विजय भी होंगे दावेदार, किसके साथ कमल नाथ?
भोपाल. सियासत में कब क्या होगा और कौन दोस्त है या दुश्मन मौजूदा दौर में कुछ नहीं कहा जा सकता है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन इसके साथ-साथ राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी सियासी पैंतरेबाजी शुरू हो गई है। अप्रैल 2020 में मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इन तीन सीटों में एक सीट कांग्रेस के खाते की है जबकि दो सीटें भाजपा के खाते की हैं। दिसबंर 2018 में मध्यप्रदेश में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है लेकिन कांग्रेस सबसे बड़ा दल है और उसके साथ निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा के लिए राजनीतिक खेल शुरू हो गया है। हालांकि अभी इस पर कोई भी नेता बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन जानकारों का कहना है कि अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष को लेना है, लेकिन राय प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से जरूर ली जाएगी।
कौन सी सीटें हो रही हैं खाली
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की 11 सीटें हैं। 3 सीटों का कार्यकाल 2020 में पूरा हो रहा है। जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, भाजपा के प्रभात झा और पूर्व मंत्री सत्य नारायण जाटिया का है। भाजपा के खाते में एक और कांग्रेस के खाते में एक सीट जाएगी लेकिन तीसरी सीट को लेकर पेंच फंस सकता है। जहां भाजपा को मुश्किलों का सामना कर पड़ सकता है जबकि कांग्रेस के पास संख्याबल है।
कांग्रेस में कई दावेदार
दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं और इस समय वो केवल राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में ये माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह एक बार फिर से अपना दावा पेश कर सकते हैं। वहीं, अगर दिग्विजय सिंह अपना दावा पेश नहीं करते हैं तो वो पूर्व सीएम अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह का नाम आगे बढ़ा सकते हैं। अजय सिंह लोकसभा चुनाव में एक रैली के दौरान कह चुके हैं कि अगर मैं हार गया तो कार्यकर्ताओं का क्या होगा क्योंकि पार्टी मुझे तो राज्यसभा भेज देगी। अजय सिंह को दिग्विजय सिंह का करीबी भी माना जा रहा है। अजय सिंह का नाम मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की रेस भी भी आ चुका है।
दूसरी तरफ सीएम कमल नाथ भी अपने खेमे के किसी नेता को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि वो किसे भेजते हैं या किसके नाम का समर्थन करते हैं इसको लेकर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी लेकिन एक नाम का जिक्र किया जा सकता है वो नाम है पूर्व विधायक दीपक सक्सेना का। दीपक सक्सेना वही विधायक हैं जिन्होंने कमलनाथ के लिए अपनी विधानसभा सीट छोड़ी थी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया को लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग चल रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया 2019 में अपना लोकसभा का चुनाव भी हार चुके हैं और मौजूदा समय में उनके पास कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही सरकार पर कई बार निशाना साध चुके हैं। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया भी एक दावेदार हो सकते हैं। जानकारों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजकर पार्टी सिंधिया को केन्द्रीय राजनीति में सक्रिय रखेगी और व मध्यप्रदेश की सक्रिय राजनीति से भी दूर रहेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष के लिए रेस में क्यों आ रहे हैं नाम
जानकारों का कहना है कि जिस तरह से कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कई नाम सामने आ चुके हैं उससे साफ ही कि ये दबाव की राजनीति है। ये नेता प्रदेश अध्यक्ष के लिए अपना दावा इसलिए पेश कर रहे हैं कि अगर इन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो कम से कम राज्यसभा के लिए इनका दावा मजबूत रहेगा। राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का चयन होना है ऐसे में सभी नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेताओं का नाम आगे कर रहे हैं लेकिन कोई भी नेता खुद को इस रेस का दावेदार नहीं बता रहा है।
Published on:
12 Nov 2019 12:26 pm
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