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कांग्रेस: बसपा, सपा और गोंडवाना से हाथ मिलाने की कोशिश तेज

कांग्रेस में भोपाल से दिल्ली तक चर्चा

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भोपाल

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Arun Tiwari

May 31, 2018

PCC bhopal

कांग्रेस: बसपा, सपा और गोंडवाना से हाथ मिलाने की कोशिश तेज

भोपाल। कांग्रेस का हाथ प्रदेश में चुनावी गठबंधन की ओर बढ़ गया है। कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश में चुनाव पूर्व गठबंधन की कोशिशों में तेजी आ गई है। कांग्रेस की कोशिश बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ सीटों पर समझौता कर चुनाव में उतरने की है। इसको लेकर दिल्ली से भोपाल तक प्रयास तेज होने लगे हैं। अलग-अलग नेताओं को समझौते का जिम्मा सौंपा गया है। कांग्रेस इस बार ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’की तर्ज पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। वह चुनावी रणनीति के लिहाज से जरूरी हर कदम उठा रही है।

किसका कितना वोट शेयर
बसपा को 2003 में 7.26 फीसदी वोट मिले थे जो 2008 में बढकऱ आठ फीसदी से ज्यादा हो गए, 2013 में 6.29 प्रतिशत वोट बसपा ने हासिल किए। समाजवादी पार्टी ने 2003 में 3.71 वोट प्राप्त किए, जिससे उसके सात विधायक भी जीते। 2008 में 1.99 और 2013 में 1.20 फीसदी वोट सपा के हिस्से में आए। 2003 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के तीन विधायक जीत कर आए। हालांकि, वोट शेयर दो फीसदी ही रहा, उसके बाद गोंडवाना का विभाजन हो गया, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों में उसका जनाधार आज भी माना जाता है।

ये है गठबंधन की रणनीति

प्रदेश का राजनीतिक मिजाज हमेशा दो ध्रुवीय रहा है, एक बार की संयुक्त विधायक दल सरकार (संविद) को छोड़ दें तो या तो यहां कांग्रेस की सरकार बनी है या भाजपा की। तीसरी शक्ति के तौर पर बसपा, सपा और अन्य दल अपनी ताकत दिखाते रहे हैं। बसपा और सपा का उत्तर प्रदेश से सटे इलाके यानी ग्वालियर-चंबल और विंध्य में असर माना जाता है। बसपा के साथ बातचीत दिल्ली यानी राहुल गांधी के स्तर पर हो रही है, कर्नाटक में सोनिया गांधी के साथ जिस तरह की निकटता मायावती ने दिखाई उससे बहुत कुछ संकेत मिल रहे हैं।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ बातचीत का जिम्मा ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है। अखिलेश ने ये संकेत दे दिए हैं कि उनकी दिलचस्पी मध्यप्रदेश में है। पीसीसी चीफ कमलनाथ की जिम्मेदारी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को अपने पाले में लाने की है। गोंडवाना का जनाधार महाकौशल क्षेत्र खासतौर पर छिंदवाड़ा के पास ज्यादा है। चुनावी गठबंधन के लिए कांग्रेस अन्य दलों के लिए 30 से 40 सीट छोडऩे पर भी सहमत हो सकती है।

बसपा सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आगे जो फैसला पार्टी प्रमुख मायावती करेंगी, उस आधार पर चुनाव लड़ेंगे।
-नर्मदा प्रसाद अहिरवार, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा

कांग्रेस के दरवाजे सभी पार्टियों के लिए खुले हुए हैं, कांग्रेस चुनावी गठबंधन के लिए सबसे बातचीत करेगी।
-मानक अग्रवाल, प्रदेश प्रभारी, मीडिया विभाग, कांग्रेस