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एमपी में 25 साल में जहां ज्यादा बाढ़ आई वहां के सभी निर्माण हटेंगे, ट्रिब्यूनल का बड़ा आदेश

Narmada- स्वत: संज्ञान लेकर एनजीटी ने जारी किया आदेश, सीएस या पीएस स्तर के अफसर को निगरानी को कहा

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Constructions to be Removed from Flood-Prone Areas Along the Narmada River in MP

Constructions to be Removed from Flood-Prone Areas Along the Narmada River in MP

Narmada- नर्मदा को न केवल पूजनीय माना जाता है बल्कि इसे मध्यप्रदेश की जीवन रेखा के रूप में भी याद किया जाता है। इसके बावजूद नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। नर्मदा किनारे किए जा रहे अवैध व अंधाधुंध निर्माणों के कारण नर्मदा पर यह संकट आया है। ऐसे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने सीमाकंन कर इस दायरे में आ रहे स्थायी निर्माण हटाने के आदेश दिए हैं। पत्रिका में 9 फरवरी को प्रकाशित नर्मदा की दुर्दशा की खबर पर स्वत: संज्ञान लेकर ट्रिब्यूनल ने ये आदेश जारी किए।

एनजीटी ने कहा है कि सीमांकन 25 साल में आने वाली सबसे ज्यादा बाढ़ के आधार पर करें, न कि सरकार के बताए आंकड़ों के आधार पर। एनजीटी ने इसके लिए मुख्य सचिव या उनके नियुक्त प्रमुख सचिव स्तर के अफसर, पर्यावरण सचिव, जल संसाधन विभाग, राज्य पीसीबी, कलेक्टरों के समन्वय से इसकी निगरानी करने को कहा।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि नदी व तालाबों में सीवेज या बिना ट्रीटेट पानी न मिले। एनजीटी ने पहले जारी अपने आदेश का हवाला देते हुए सरकार को अक्षरश: पालन करने का आदेश दिया।

जिलों में टास्क फोर्स का गठन हो चुका है इसलिए आदेश की प्रति सीहोर, भोपाल, इंदौर कलेक्टर, एमपीपीसीबी को भेजें

एनजीटी ने कहा कि जिलों में टास्क फोर्स का गठन हो चुका है इसलिए आदेश की प्रति सीहोर, भोपाल, इंदौर कलेक्टर, एमपीपीसीबी को भेजें। उन्हें निर्देश दें, वे अफसर नियुक्त करें या जिला निगरानी समिति को अवैध खनन की सूचना पर मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दें।

यह भी दिए निर्देश

नर्मदा किनारे एसटीपी निर्माण समय पर पूरा करें।
नदी के आसपास 100 मीटर दायरे में पॉली कैरी बैग व प्लास्टिक सामग्री का उपयोग प्रतिबंधित करें।
किनारे के पेड़ों की कटाई न हो, अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण हटाएं।
संबधित निकाय नर्मदा किनारे निर्माण अनुमति न दें।
नर्मदा घाटी में जल प्रबंधन के लिए व्यापक योजना बनाएं, इसमें नदियों के सतही जल के साथ भूमिगत जल का प्रबंधन भी शामिल हो।
नदी तल से रेत और अन्य खनिजों का अवैध खनन न हो। नदी के आसपास ईंट भट्टे लगाने की अनुमति न दें।
नदी किनारे सुरक्षित दूरी पर दाह संस्कार की उचित व्यवस्था करें।
सिंचाई विभाग, वन विभाग से समन्वय कर नर्मदा किनारे खाली क्षेत्रों, बाढ़ के मैदानों की पहचान कर ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित करें।