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ज्यादा ‘चीज’ खाने वाले सावधान ! हो सकती है गंभीर बीमारी, डोसा, उत्तपम और पराठे सब में हो रहा इस्तेमाल

-राजधानी में हर साल 250 मीट्रिक टन चीज की खपत इसका ज्यादा सेवन सेहत के लिए खतरनाक

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fast food

भोपाल। फास्टफूड के साथ अब पारंपरिक व्यंजन में भी घी और मक्खन की बजाय चीज का स्वाद चढ़ने लगा है। शहर में लोग एक साल में लगभग 250 मीट्रिक टन चीज चट कर रहे हैं। पिछले सालों की तुलना में इसकी खपत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पहले पिज्जा, पास्ता, बर्गर, सैंडविच जैसे फास्ट फूड में ही चीज सीमित था लेकिन, अब घरों में बनाए जाने वाले डोसा, उत्तपम और परांठे जैसे पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में भी इसे शामिल किया जा रहा है। यंग जनरेशन हर खाने की डिश में चीज ढूंढ़ती है। लेकिन, चिकित्सकों के मुताबिक इसका नियमित सेवन नुकसानदायक है। ये मोटापे के साथ कई अन्य बीमारियों को जन्म देता है।

गांवों के मुकाबले शहरों में खपत ज्यादा

गांवों के मुकाबले शहरों के घरों में चीज की खपत ज्यादा हो रही है। वहीं रेस्टोरेंट्स, होटलों में भी चीज का प्रचलन बढ़ा है। शहर के लगभग 5 फीसदी लोग इसका नियमित सेवन कर रहे हैं। जबकि, गांवों में यह अभी कम है।

राज्य में हर माह खपत की स्थिति

घी -18,000 मीट्रिक टन
मक्खन- 400
चीज- 250

50 हजार टन की खपत

2002 में, भारत में 7,500 टन चीज की खपत हुई जो अब बढ़कर 2015 में लगभग 34,000 टन हो गया है। अनुमान के मुताबिक पूरे देश में अभी लगभग 50 हजार टन चीज की खपत होती है। भारत में बाजार 2021 में 56.7 बिलियन रुपए का रहा। यह 2027 तक बढ़कर 211.5 बिलियन रुपए तक हो जाएगा।

ब्लड प्रेशर और मोटापा बढ़ने का खतरा

डॉ रजनीश जोशी, मेडिसन विशेषज्ञ, एम्स भोपाल चीज शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है, ये प्रोसेस्ड फूड होता है। इसके अंदर सॉल्ट की मात्रा अधिक होती है। सॉल्ट कंटेट की ज्यादा मात्रा से ब्लडप्रेशर बढऩे का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही चीज से अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होती है, जिससे बीएमआइ बढ़ता है और मोटापा बढऩे लगता है। इस तरह के खानपान से आजकल बच्चों में भी अत्यधिक मोटापे की समस्या देखने को मिल रही है। चीज का नियंत्रित तरीके से सेवन जरूरी है।