
led light
राधेश्याम दांगी. भोपाल. भोपाल सहित प्रदेश के 370 नगरीय निकायों में एलइडी लाइट लगाने के लिए सरकार को कोई ठेकेदार ही नहीं मिल रहा है। सरकार ने चुनाव से पहले सभी निकायों में एलइडी लाइट लगाने की योजना तैयार की थी, लेकिन स्थानीय नेतागीरी के कारण ठेकेदारों ने काम हाथ में नहीं लिया। इससे नगरीय विकास एवं आवास विभाग हैरानी में पड़ गया है। पीपीपी मॉडल पर सभी शहरों की स्ट्रीट लाइट को एलइडी में बदला जाना है। अभी बड़े नगर निगमों का करीब 77740.48 लाख रुपए बिजली बिल आता है। एलइडी लगने पर यह बिल आधा हो जाएगा। निजी कंपनियों से ऑफर बुलाकर वर्तमान में लगी सभी लाइट बदलकर उनकी जगह एलइडी लाइट लगाना है। इसके लिए 80 फीसदी नगरीय निकाय संबंधित कंपनी को देगा। 7 साल तक इन कंपनियों को ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस भी करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए क्लस्टर बनाकर शहरों को अलग-अलग बांटा गया है, ताकि काम आसानी से किया जा सके। लेकिन चुनावी साल में स्थानीय नेताओं की राजनीति के कारण कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा तक नहीं लिया।
शर्तें बदली फिर भी नहीं मिले ठेकेदार
शुरुआत के टेंडरों में कठोर शर्तें थी। इसके कारण कोई भी बिडर नहीं आया। प्री-बिड मीटिंग में शर्तों में संशोधन की बात उठाई गई, लेकिन अफसरों ने नहीं मानी। बाद में जब कोई बिडर नहीं मिला तो तीसरी और चौथी बार निकाले गए टेंडरों में कई शर्तें हटा दी गई। इसके बाद भी ठेकेदार नहीं मिले।
अभी इतना बिल भर रहे नगर निगम
भोपाल नगर निगम 4 करोड़ 31 लाख व कोलार 12 लाख 70 हजार, इंदौर 4 करोड़ 65 लाख, जबलपुर 2 करोड़ 82 लाख, सागर 35 लाख, ग्वालियर नगर निगम 4 करोड़ 2 लाख रुपए प्रति माह बिजली बिल भर रहे हैं। एलइडी लाइट लगने से सभी नगर निगमों सहित शहरों का बिल आधा हो जाएगा। निकायों का बिजली खर्च बचाने के लिए ही यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, लेकिन लागू ही नहीं हो पाया।
हमने शर्तों में कई बदलाव किया। ठेकेदार और भी बदलाव चाहते थे, लेकिन हमारा नियंत्रण ही नहीं होगा तो पीपीपी मॉडल और शासन की उपस्थिति ही खत्म हो जाएगी। कई बदलाव किए लेकिन ठेकेदार नहीं आए। उम्मीद है अगले टेंडर ऑफर में ठेकेदार आ जाएं।
प्रभाकांत कटारे, इएनसी, नगरीय आवास एवं विकास विभाग
Published on:
13 Sept 2018 06:10 am
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