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रतलाम में अस्पताल गिरा, HEALTH मिनिस्टर बोले- तो हम क्या करें

ज्ञात रहे कि रतलाम में शनिवार रात को जिला अस्पताल की छत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि दस से अधिक लोग घायल हो गए।

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Anwar Khan

Jul 26, 2016

rustam singh

rustam singh

भोपाल. रतलाम में जिला अस्पताल की छत गिरने के मामले में स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह के अजब ही बोल हैं। उनका कहना है कि अस्पताल की छत गिर गई तो वह क्या कर सकते हैं। कार्रवाई के सवाल पर बोल उठे कि किस पर कार्रवाई करें, किसी पर भी कार्रवाई नहीं हो सकती है।


सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुस्तम सिंह ने कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग जर्जर थी, गिर गई। अब क्या कर सकते हैं। जिम्मेदारों पर कार्रवाई के सवाल पर कहा कि आप लोग ही बता दो किस पर कार्रवाई कर दें। फिर बोले के किसी पर भी कार्रवाई नहीं हो सकती है। उनसे जब प्रदेश के दूसरे अस्पतालों के जर्जर भवनों के बारे में पूछा गया तो वह बोल उठे के उन्हें नहीं मालूम कि प्रदेश में कितने अस्पतालों के भवन जर्जर हैं।



ज्ञात रहे कि रतलाम में शनिवार रात को जिला अस्पताल की छत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि दस से अधिक लोग घायल हो गए। ये हालत तब है जब प्रदेश भर के सरकारी अस्पताल बदहाल हैं। इमारतें जर्जर हो रही हैं, कहीं छज्जे गिर रहे हैं, किसी अस्पताल की इमारत की दीवार दरक गई है। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया और जेपी अस्पताल का सोमवार को पत्रिका ने जायजा लिया तो यहां भी बदतर स्थिति सामने आई है।


hamidiya hospital
हमीदिया अस्पताल
स्थिति : सबसे ज्यादा खराब स्थिति वार्डों में हैं। पटेल वार्ड सहित अन्य वार्डों की दीवारें सीलन के चलते खराब हो चुकी हैं। प्लास्टर उखड़ चुका है स्थिति यह है कि बारिश में इन दीवारों में करंट आने लगता है। अस्पताल का नया भवन बनाने का प्रस्ताव है लेकिन फिलहाल इसकी संभावना नहीं है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ.़ डीके पाल के मुताबिक समय समय पर पीडब्ल्यूडी द्वारा रिनोवेशन का काम होता रहता है।
पहले हुआ हादसा : 2012 में ओपीडी और वार्ड की दीवारें गीली होने के चलते करंट आ गया था। इसकी चपेट में आने पर एक मरीज के परिजन को भर्ती भी करना पड़ा था।

JP hospital

जेपी अस्पताल
स्थिति : नया भवन बन गया है लेकिन पुराने भवन में भर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। पुराने भवन में जांच, सोनोग्राफी के साथ ऑपरेशन थिएटर, प्रसूती वार्ड और अन्य क्लीनिक हैं। यह भवन कई जगह से जर्जर हो चुके हैं, बिजली की लाइनें खुली होने से हादसे की संभावना बनी रहती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि नए भवन बनने से पुराने भवन का भार कम हो गया है।
पहले हुआ हादसा : मई 2014 में मेटर्न रूम की सीलिंग का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। उस समय सिस्टर मरीज को देखने रूम के बाहर आई थी। इसी तरह बीते साल भी बिजली के तारों में आग लगी गई थी।

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