
भोपाल. मध्यप्रदेश में कोरोना बेकाबू हो चुका है. कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं. प्रदेशभर में सैंकड़ों बच्चों को कोरोना हो चुका है. बच्चों की जान पर खतरा पास आ चुका है, जिससे बच्चे और अभिभावक डरे हुए हैं पर ऐसी स्थिति में भी स्कूल खुले हुए हैं. सबसे बुरी बात तो यह है कि इसके लिए प्राइवेट स्कूल संचालकों का राज्य सरकार पर दबाव की बात कही जा रही है.
प्रदेश में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है. इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में हालात बहुत बुरे हैं. इसके बाद भी प्रदेशभर में स्कूल खुले हैं और पहली से 12वीं तक की कक्षाएं बदस्तूर लग रहीं हैं. तीसरी लहर में बच्चों में कोरोना संक्रमण की तेज गति को देखते हुए जहां अभिभावक भयभीत हैं वहीं सरकार अभी तक स्कूल बंद करने का निर्णय नहीं ले पाई है. यह स्थिति तब है जबकि देश के कई राज्यों में स्कूल बंद किए जा चुके हैं.
बच्चों में संक्रमण को देखते हुए कई बच्चों, अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों ने भी सरकार से स्कूल बंद किए जाने की मांग की है. इस संबंध में जहां पालक महासंघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से आग्रह किया है वहीं शिक्षक कांग्रेस ने भी सरकार को पत्र लिखा है. इधर बढ़ते खतरे के बाद भी स्कूल खुले रखने पर प्राइवेट स्कूल संचालकों के लालच को जिम्मेदार बताया जा रहा है.
अभिभावकों का कहना है कि प्राइवेट स्कूल नहीं चाहते कि स्कूल बंद हो. स्कूल खुले रहने से प्राइवेट स्कूलवालों को बच्चों की पूरी फीस वसूलने का मौका मिल रहा है. पालक महासंघ के महासचिव प्रबोध पंड्या ने तो स्पष्ट आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार प्राइवेट स्कूलों के दबाव में है और उनकी ही भाषा बोल रही है. उन्होंने तुरंत ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन स्कूल लगाने की सीएम शिवराजसिंह और शिक्षा मंत्री से मांग की है.
गौरतलब है कि तीसरी लहर में ग्वालियर, इंदौर और भोपाल में ही करीब 300 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं. भोपाल जिले में ही पिछले तीन दिनों में 75 बच्चों में संक्रमण मिल चुका है. बच्चों को तेजी से होते संक्रमण के कारण ऑनलाइन मोड पर क्लासेस लगाने की मांग भी तेज हो रही है.
Published on:
10 Jan 2022 11:58 am
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