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महंगे हुए कपड़े, 25 फीसदी तक बढ़े दाम, जानिए कब तक बनी रहेगी ऊंची कीमत

साड़ियों से लेकर टावल भी महंगा।  

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साड़ियों से लेकर टावल भी महंगा।

भोपाल। मध्यप्रदेश में कपड़े महंगे हो गए हैं. साड़ियों से लेकर टावल के दाम बढ़ गए हैं. खासतौर पर सूती कपड़े की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है. सूती कपड़े के दाम 25 फीसदी तक बढ़े हैं. बैरागढ़ में थोक कपड़ा मंडी के व्यापारियों के अनुसार देश में कपास का उत्पादन कम हो जाने और निर्यात बढ़ जाने से सूती कपड़ा बहुत महंगा हो गया है। इससे कारोबार पर भी जबर्दस्त असर पड़ा है। थोक बाजार में टर्नओवर 30 फीसदी तक कम हो चुका है। थोक व्यापारियों के अनुसार अभी लोग जरूरत का कपड़ा ही खरीद रहे हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्र में काटन कपड़े की मांग में जोरदार गिरावट आई है। सबसे बुरी बात तो यह है कि सूती की ऊंची कीमतें अभी बनी रहने की संभावना है.

व्यापारी बताते हैं कि कुछ माह पहले कच्चे तेल के दाम में अचानक उछाल आ गया था जिससे कपड़े के दाम बढ़ गए थे। इसके बाद ग्रे और यार्न के दाम भी बढ़ गए। इससे कपड़े पर दोहरी मार पड़ी। सूती कपड़ा एकाएक 40 फीसदी तक महंगा हो गया। इसी बीच कच्चे तेल के दाम में कुछ कमी आने से कपड़ों में भी कुछ राहत मिली लेकिन अब दोबारा इनके दाम ज्यादा हो गए हैं. दरअसल कपास का उत्पादन कम हो जाने और विदेशों से मांग निकलने से घरेलू बाजार में सूती कपड़ा महंगा हो गया है।

बैरागढ़ के थोक कपड़ा मंडी के व्यापारियों के अनुसार पिछले साल की अपेक्षा सूती कपड़ा करीब 25 फीसदी महंगा हो चुका है। व्यापारियों के मुताबिक उनका पुराना स्टाक खत्म हो चुका है। ऐसे में ग्राहकों को महंगा कपड़ा ही मिल पा रहा है। सूती कपड़े की मांग ग्रामीण इलाकों में अधिक रहती है। व्यापारियों के अनुसार दाम बढ़ने से कपड़ों की मांग बहुत कम हो गई है। सूती साड़ियां तो बहुत कम बिक रही हैं। चादरें, लठ्ठा, दोहर, टावल, रजाई के कवर पर भी महंगाई की मार पड़ी है। पर्दा क्लाथ एवं चादरें भी महंगी हो गई हैं। गर्मियों में सूती कपड़े की मांग बहुत रहती है लेकिन महंगाई के कारण इस बार कारोबार बहुत कम रहा। कपड़ा संघ के पदाधिकारी बताते हैं कि बिक्री करीब 30 फीसदी तक कम हुई है।