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यहां पर मिलता है सबसे ज्यादा ‘शुद्ध दूध’, रोज डोर-टू-डोर की जाती है सप्लाई

- गाय के आर्गेनिक दूध की हैं कई खासियतें- केरवा बांध स्थित बुल मदर फॉर्म में हैं 175 से ज्यादा देसी गायें-राजधानी में रोज 700 लीटर की है सप्लाई

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श्याम सिंह तोमर, भोपाल। शहरों में आज गाय का शुद्ध दूध मिलना आसान नहीं है। इस पर भी देसी नस्ल की गाय का अमृत तुल्य दूध मिलना सपने जैसा है। लेकिन राजधानी में इसे हकीकत में बदला है केरवा बांध स्थित बुल म फॉर्म ने, जहां नामचीन देसी नस्ल वाली गायें गिर, साहीवाल, मालवी, निमाड़ी, कैनकथा से सुबह और शाम 700 से 800 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।

मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम की ओर से संचालित इस फॉर्म में देसी गोवंश के विकास के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग हो रहा है। इन गायों को फॉर्म के अंदर उगाया गया हरा चारा खिलाया जाता है। चारा उगाने में गोबर खाद, गोमूत्र का उपयोग किया जाता है। यहां से दूध सप्लाई की भी व्यवस्था है। दूध को बिना पाश्चुरीकृत किए आधे-आधे लीटर के पैकेट में पैक किया जाता है। इसका मूल्य भी 58 रुपए प्रति लीटर रखे गए हैं ।

ये हैं खासियतें

-16 गाय वाली एक यूनिट ऐसी जिसमें सब-कुछ स्वचालित

-गायों के रखरखाव, चारा देने से लेकर दूध निकालने तक सब कुछ मशीन से होता है।

-कोशिश है कि सभी देसी गायों के लिए इस तरह की व्यवस्था लागू की जाए।

डोर-टू-डोर की जाती है सप्लाई

दो रूट पर विशेष वाहन से डोर-टू-डोर दूध की सप्लाई की जाती है। सुबह के समय दूध वितरण के लिए जो पहला रूट तय किया गया है, उसमें श्यामला हिल्स, कोटरा, रिवएरा टाउनशिप, तुलसी नगर, चार - इमली, अरेरा कॉलोनी और - शाहपुरा हैं। इसी तरह शाम के समय चूना भट्टी, गुलमोहर, रचना नगर, गौतम नगर, एमराल्ड, बागमुगालिया और कटारा क्षेत्र शामिल हैं। उक्त वाहन चालक के माध्यम से कोई भी सुरक्षा निधि जमा कर दूध लेना शुरू कर सकता है।

डॉ. एचबीएस भदौरिया, प्रबंध संचालक, मप्र राज्य पशुधन, कुक्कुट विकास निगम का कहना है कि शुद्ध दूध का उत्पादन बढ़ाने बुल मदर फॉर्म में उच्च आनुवांशिकता वाली देसी गायों को लाया जाएगा। ये गाय एक दिन में 14-15 लीटर तक दूध देती हैं। इससे उत्पादन 1000 से 1200 लीटर तक पहुंच जाएगा।