
मृत युवती के पिता के खिलाफ भी केस दर्ज
भोपाल. महू में एक आदिवासी युवती की कथित रूप से गेंगरेप और हत्या के बाद मचे बवाल में पुलिस की भूमिका पर फिर सवाल उठे हैं। इस मामले में युवती के पोस्टमार्टम में पुलिस द्वारा सही तरीका नहीं अपनाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने परिजनों पर दबाव डालकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश भी की। इतना ही नहीं, पुलिस गोलीबारी में जिस आदिवासी युवक की मृत्यु हुई, अब उसे भी आरोपी बना दिया गया है।
महू कांड में विपक्षी दल राज्य सरकार को घेर रहे हैं। कांग्रेस, दलित और आदिवासी संगठनों तथा नेताओं का आरोप है कि जो असल अपराधी हैं, उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। सरकार पीडि़तों को ही अपराधी बता रही है। ये आरोप उस समय सही साबित होते दिखे जब पुलिस ने गोलीबारी में मृत आदिवासी युवक को ही आरोपी बना डाला।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए भेरूलाल के खिलाफ ही पुलिस ने हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर लिया है। गौरतलब है कि आदिवासी युवक भेरूलाल की मौत के बाद राज्य सरकार ने उसके परिजनों को 10 लाख रुपए मुआवजा दिया है। इसके साथ ही युवती के परिवार के लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। इनमें युवती के पिता भी शामिल हैं।
इधर मामले में कांग्रेस ने आदिवासी नेताओं का जांच दल गठित किया था जिसने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को रिपोर्ट सौंप दी है। जांच दल में विधायक कांतिलाल भूरिया, बाला बच्चन, विधायक पांचीलाल मेड़ा और झूमा सोलंकी शामिल थीं। कांग्रेस नेताओं की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस आदिवासी युवक भेरूलाल की पुलिस की गोलीबारी में मौत हुई, वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था। मृत युवती का पोस्टमार्टम नियमानुसार नहीं किया गया। उसके परिजनों पर पुलिस ने दबाव डालकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय भाजपा सांसद के दबाव में 9 घंटे तक मामले को दबाने की कोशिश की गई।
Published on:
18 Mar 2023 08:22 am
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