
Death of bone
भोपाल। कोरोना संक्रमण से मुक्ति के बाद मरीजों में पोस्ट कोविड इफेक्ट लगातार सामने आ रहे हैं। कोरोना को मात दे चुके मरीज अब नई परेशानी से जूझ रहे हैं। कोरोना से जूझ चुके मरीजों के कूल्हे में रक्त सप्लाई रूकने और कूल्हे की हड्डियों के खराब होने जैसे मामले भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इसमें कई ऐसे मरीज भी मिले हैं जिनके कूल्हे का ऑपरेशन तक कराना पड़ा है। चिकित्सकों के मुताबिक इस बीमारी को ऑस्टियो नेक्रोसिस या एवैस्क्लुर नेक्रोसिस कहा जाता है।
हमीदिया अस्पताल के अस्थि रोग विभाग की ओपीडी में हर रोज एक से दो लोग इस परेशानी के साथ पहुंच रहे हैं। ऑथोर्पेडिक्स विशेषज्ञ और विगागाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया बताते हैं कि ऑस्टियो नेक्रोसिस वैसे कई वजह से हो सकता है। लेकिन कोरोना के दौरान स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल के चलते अब यह बीमारी बढ़ गई है। पहले जहां सप्ताह में एक या दो मरीज आते थे अब लगभग हर रोज एक मरीज आ रहा है।
स्टेरॉयड लेने वालों को है ज्यादा खतरा
अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल वर्मा बताते हैं कि ऑस्टियो नेक्रोसिस की समस्या सबसे अधिक कूल्हे की हड्डी में होती है, जिसकी वजह से हड्डी का गोल हिस्सा, जो कूल्हे का जोड़ बनता है, वो गलने लगता है। आमतौर पर 30 से 60 साल की उम्र में रोग होता लेकिन कोरोना के उन मरीजों पर इसका असर ज्यादा मिला जिन्हें इलाज के दौरान ज्यादा स्टेरॉयड दिया गया हो।
क्या हैं बोन डेथ के लक्षण?
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जांघ और कूल्हे की हड्डियों में दर्द, हर समय हड्डियों में दर्द रहना, चलने में परेशानी होना, हाथ, कंधे, घुटने, पैर और जोड़ों में दर्द बोन डेथ के लक्षण हैं।
कैसे होता है 'बोन डेथ' का इलाज
डॉक्टर वर्मा बताते हैं अगर लगातार कई दिनों से दर्द बना है, तो हड्डी के डॉक्टर से सलाह लें। सामान्य उपचार के से दर्द कम ना होने पर एमआरआई की जाएगी। एक महीने बाद एमआरआई से इसका पता लगाया जा सकता है। तीन महीने बाद यह एक्सरे में भी नजर आने लगता है। शुरुआती दिनों में पता चलने पर इसका इलाज हो सकता है।
Published on:
27 Apr 2022 12:39 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
