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जनेऊ दिखाकर, त्रिपुंड लगाकर युवा ब्राह्मणों ने मांगा आरक्षण

परशुराम मंदिर के सामने किया प्रदर्शन, बोले हम हंै ब्राह्मण

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Demand for ending caste reservation system, Brahmin society performed

भोपाल। शिवाजी नगर स्थित परशुराम मंदिर के सामने गुरुवार को ब्राह्मण समाज के युवाओं ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने और पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। यहां ब्राह्मण समाज के युवा धोती, जनेऊ पहनकर और त्रिपुंड लगाकर आए थे। उन्होंने हाथों से जनेऊ दिखाकर और त्रिपुंड दिखाकर नाराजगी जताई और आरक्षण को लेकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में अर्धनग्र होकर ब्राह्मणों ने अपना विरोध दर्ज किया।

प्रदर्शन में शामिल चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि 16 अप्रैल को परशुराम मंदिर में आयोजित मुख्यमंत्री की सभा में आरक्षण को लेकर मांग और नारेबाजी करने के बाद समाज के ही कुछ वरिष्ठ रमेश शर्मा, शिव चौबे आदि ने यह बयान दिया कि जो लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वे जनेऊधारी ब्राह्मण नहीं थे, बल्कि असामाजिक तत्व थे। इसलिए आज हमे ब्राह्मणों में वेष में अर्धनग्र होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। आरक्षण को लेकर जो विरोध हुआ था, वह ब्राह्मणों ने ही किया था, जातिगत आरक्षण के कारण ब्राह्मणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 16 अप्रैल को ब्राह्मण समाज की सभा में पदोन्नति में आरक्षण की तख्ती लेकर नारेबाजी करने वाले अभिषेक तिवारी ने कहा कि तख्ती लेकर वे ही खड़े थे, उन्होंने अपना जनेऊ, शिखा और त्रिपुंड दिखाते हुए कहा कि क्या ब्राह्मण होने का कोई इससे बड़ा सबूत चाहिए।

हम हैं माई के लाल
ब्राह्मणों ने जोरदार नारेबाजी कर भी अपना आक्रोश व्यक्त किया। हाथों में तख्तियां लेकर माथे में त्रिपुंड जनेऊ डाल, हम है माई के लाल, जब-जब ब्राह्मण बोला है, राज सिंहासन डोला है, जातिगत आरक्षण खत्म करो जैसे नारे लगाए।

बेरोजगारों के साथ धोखा है ६२ वर्ष का फार्मूला
भोपाल। सरकारी नौकरियों में सेवानिवृत्ति आयु दो साल बढ़ाकर ६२ वर्ष करने के फार्मूले पर बेरोजगार सेना ने मोर्चा खोल दिया है। मोर्चा संरक्षण अक्षय हुंका ने कहा कि सरकार के इस फैसले ने प्रदेश के लाखों युवाओं के नौकरी में आने के सपने को तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में भारी धांधली चल रही है। व्यापम में नॉर्मलाइजेशन के नाम पर धांधली, अपेक्स बैंक में निकली नौकरी में गड़बड़ और लेखापालों की नियुक्ति में देरी इसके उदाहरण हैं। परीक्षा फीस के नाम पर खुली लूट हो रही है। दूसरे प्रदेश के लोगों द्वारा हमारे युवाओं का हक मारा जा रहा है। लोगों को न प्राइवेट नौकरियां मिल रही हैं और न स्वरोजगार योजनाओं में लोन। ऊपर से सरकार ने अब सभी हदें पार करते हुए सरकारी नौकरियों में रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ा कर 62 वर्ष कर दी है।