
Dengue: डेंग से तेज हो सकती है धड़कन (Photo Source - Patrika)
Dengue: एमपी के भोपाल शहर में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच इसे अब केवल प्लेटलेट्स घटाने, तेज बुखार, शरीर में दर्द और गंभीर मामलों में रक्तस्राव करने वाला रोग मानना खतरनाक होगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर डेंगू के मरीजों में वायरस हृदय की मांसपेशियों में सूजन (मायोकार्डाइटिस), दिल की धड़कन में गड़बड़ी और हार्ट फेल होने जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा करते हैं। डेगू के ऐसे कुछ मामले आए है।
समय पर पहचान और उपचार से खतरा टल सकता है। मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलना, धड़कन तेज या अनियमित होना, बेहोशी या इलाज के बावजूद लो ब्लड प्रेशर जैसी शिकायत हो तो तुरंत अस्पताल जाएं। भोपाल में इस वर्ष अब तक 44 डेंगू मरीज सामने आ चुके है। इस मामले में भोपाल प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बुजुर्ग और गंभीर डेंगू (डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम) से पीड़ित मरीजों में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों में शरीर से प्लाज्मा का रिसाव, व्यापक सूजन और रक्त संचार में अस्थिरता के कारण दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे तीव्र हार्ट फेल (एक्यूट हार्ट फेल्योर), कार्डियोजेनिक शॉक या गंभीर अनियमित धड़कन जैसी स्थितियां पैदा होती है।
तेज धड़कन बनी खतरे का संकेत
साकेत नगर निवासी आकाश वर्मा को डेंगू की पुष्टि के बाद सीने में भारीपन और तेज धड़कन की शिकायत हुई। डॉक्टरों ने ईसीजी, ट्रोपोनिन और 2डी-ईको जांच कराई, जिसमें प्रारंभिक डेंगू मायोकार्डाइटिस के संकेत मिले। समय पर इलाज से उनकी स्थिति नियंत्रित हो गई।
बुखार उतरा, दिल हुआ प्रभावित
करोंद की नेहा शर्मा का बुखार कम होने के बाद सीने में दर्द और सांस फूलने लगी। ईसीजी और 2डी-ईको जांच की गई। डॉक्टरों को जांच में रोगी के हृदय की मांसपेशियों में थोड़ी सूजन दिखाई दिया। निगरानी बढ़ाने के बाद हालत में सुधार हुआ।
कमजोरी के साथ सांस की समस्या
करोंद के इरफान अंसारी को डेंगू के दौरान अत्यधिक कमजोरी और बिना चले भी सांस फूलने लगती थी। ट्रोपोनिन और ईसीजी जांच में प्रारंभिक डेंगू मायोकार्डाइटिस के संकेत मिले। चार दिन उपचार और निगरानी के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुई।
जीएमसी के हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रो डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, डेंगू के कुछ मरीजों में हृदय संबंधी जटिलताएं होती है। वायरस सीधे हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है या शरीर की अत्यधिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण हृदय में सूजन हो सकती है। इससे दिल की पंपिंग क्षमता कमजोर हो जाती है और दिल की धड़कन की सामान्य लय भी बिगड़ जाती है। डेंगू हेमोरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हार्ट के आसपास की झिल्लियों में पानी जमने से प्रोटीन कम होता है
हृदय प्रभावित होने की आशंका होने पर डॉक्टर ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी, ट्रोपोनिन और एनटी-प्रोबीएनपी जैसी जांच कराते हैं। इनसे हृदय की कार्यक्षमता और सूजन का समय रहते पता चल जाता है, जिससे इलाज की रणनीति बदली जा सकती है।
ताइवान में 65.906 डेंगू मरीजों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि संक्रमण के पहले सप्ताह में तीव्र हृदय विफलता का खतरा सबसे अधिक रहता है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों और गंभीर डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती लोगों में यह जोखिम ज्यादा पाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली बीमारी है। यह हृदय के अलावा लीवर, किडनी, मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इलाज के दौरान केवल प्लेटलेट्स पर नहीं, बल्कि मरीज की पूरी शारीरिक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
Updated on:
19 Jul 2026 10:44 am
Published on:
19 Jul 2026 10:44 am
