
Director Veena Bakshi
भोपाल। सेंसर बोर्ड को कट की परमीशन है ही नहीं उसका काम सर्टिफिकेशन का है लेकिन जो सेंसरशिप की जा रही है वो प्रावधान में ही नहीं है। लोगों को लगता था कि प्रसून जोशी जैसा व्यक्ति बहुत लिबरल है लेकिन प्रसून भी उतने ही पॉलिटिकल और नॉन लिबरल हैं जितने पहलाज निहालानी थे। यह कहना है डायरेक्टर वीना बख्शी का। इंटरनेशनल स्पिरिचुअल फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने आईं वीना की नसीरुद्दीन शाह , रत्ना पाठक और रणदीप हुड्डा स्टारर मूवी 'कॉफिन मेकर' की स्पेशल स्क्रीनिंग रविवार को डायलॉग को-वर्किंग स्पेस में भी हुई। इस दौरान पत्रिका प्लस से हुई विशेष बातचीत में वीना ने यह बात शेयर की।
मूवी पसंद ना हो तो मत देखो लेकिन किसी को देखने से मत रोको
मूवीज पर सेंसरशिप के सवाल पर वीणा ने कहा कि किसी भी आर्ट फॉर्म पर सेंसरशिप बिल्कुल गलत है। वहीं विरोध के सवाल पर कहा कि अगर आपको कोई मूवी पसंद नहीं है मत देखो यह आपका अधिकार है लेकिन आपके पास लोगों को देखने से रोकने का अधिकार नहीं है। पद्मावत महज एक फिल्म है लेकिन चंद लोगों ने इसे ऐसा बना दिया है कि इसके लिए देश बदलने को तैयार हैं। इससे पहले १९८१ में श्याम बेनेगल के निर्देशन में भारत एक खोज प्रोग्राम बना था। उसमें मलिक मोहम्मद जायसी की रचना पद्मावत पर एक एपिसोड आया था उस वक्त किसी ने कुछ नहीं बोला।
खतरनाक हंसी के चलते रणदीप को किया साइन
फिल्म कॉफिन मेकर के बारे में वीना ने बताया कि मुझे डेथ के किरदार के लिए गुड लुकिंग कैरेक्टर चाहिए था जिसकी एक पर्सनैलिटी भी हो। एक पार्टी में मैंने बड़ी खतरनाक सी हंसी सुनी, घूमकर देखा तो वो रणदीप हुड्डा थे जो अपने फ्रेंड्स की लेग पुलिंग कर रहे थे। तब मैंने डिसाइड किया कि मेरी मूवी में डेथ का किरदार रणदीप ही करेंगे। मैंने रणदीप को स्क्रिप्ट दी तो उन्हें काफी पसंद आई और उन्होंने ही मुझे नसीर से इंट्रोड्यूस कराया। दो महीने तक मेरी स्क्रिप्ट नसीर के पास पड़ी थी उन्होंने पढ़ी नहीं। एक दिन रणदीप ने उन्हें बोला कि सिर्फ २ घंटे लगते हैं स्क्रिप्ट पढऩे में आप एक बार पढ़ तो लो। जब उन्होंने पढ़ी तो रणदीप को फोन किया कि चलो यह फिल्म करते हैं। वहीं रत्ना पाठक को फिल्म के प्रोड्यूसर ने बिना मेरी जानकारी के कास्ट किया था। इस रोल के लिए वो मेरी च्वाइस कोई और थी।
तीसरे दिन हुआ ६ फिल्मों का प्रदर्शन
भारत भवन व ट्राइबल म्यूजियम में चल रहे इंटरनेशनल स्पिरिचुअल फिल्म फेस्टिवल में रविवार को छह फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। तीसरे दिन की शुरुआत वीणा बख्शी की वर्कशॉप से हुई। इस दौरान उन्होंने फिल्म मेकिंग से जुड़ी बातों पर चर्चा की। वहीं भारत भवन में सुबह कार्तिक चटर्जी द्वारा निर्देशित 'यांत्रिक', परम तोमनेक द्वारा निर्देशित 'रस यात्रा' का प्रदर्शन हुआ। वहीं दोपहर में पाउला दे पल्पोरियो और लीजा लीमन द्वारा निर्देशित 'अवेक : द लाइफ ऑफ योगानंद' और डेविड गुरबिन द्वारा निर्देशित फिल्म 'बुद्धा' का प्रदर्शन किया गया। वहीं जनजातीय संग्रहालय में बरगुरु रामचंद्रप्पा की बेक्कू (द कैट) और जॉर्डी कैरोट की फिल्म 'अर्थसूत्र' का प्रदर्शन हुआ।
भोपाल में शूट करुंगी नेकस्ट प्रोजेक्ट
वीणा ने बताया कि भोपाल शूटिंग फ्रैंडली है, मेरी स्टोरी के हिसाब से यह एकदम परफेक्ट शहर है। मुझे यूपी में शूट नहीं करना था, मेरी पहली च्वाइस एमपी ही है। मेरे चीफ अस्सिटेंट डायरेक्टर भी उज्जैन से ही हैं। मेरी अपकमिंग फिल्म के लिए कास्ट एंड क्रू फाइनल है बस हम फाइनेंसर की तलाश हैं। इस फिल्म में हम भोपाल के आर्टिस्ट को जरूर लेंगे क्योंकि यहां काफी अच्छा टैलेंट है।
Published on:
22 Jan 2018 06:01 pm
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