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भोपाल। आज लोग इंटरनेट की गिरफ्त में हैं। वे हर बात का हल ऑनलाइन खोजने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में रोजाना डॉक्टरों के पास ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जो ऑनलाइन जानकारी एकत्र कर खुद का इलाज करने लगते हैं। इस वजह से खांसी, एलर्जी, चेहरे पर दाने, तेज हार्टबीट, कॉन्स्टिपेशन जैसी समस्या का खुद ही इलाज करने लगते हैं। इससे समस्या और विकराल रूप ले लेती है। इसके बाद वे डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं।
केस-1
28 वर्षीय छात्र के चेहरे पर 6 माह से छोटे दाने हैं। उसने ऑनलाइन सर्च कर एक ट्यूब मंगाकर लगाया और सफेद निशान पड़ गए। उसने कोलार स्थित निजी क्लीनिक में डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर ने कहा कि ट्यूब सिर्फ 10 मिनट लगाना था। मगर जानकारी न होने से छात्र लंबे समय तक लगाता था। अब 12 हजार प्रति माह का खर्च निशान हटाने में हो रहा है।
केस-2
28 वर्षीय महिला सोमवार को एम्स पहुंची। इमरजेंसी में डॉक्टर के पूछने पर बोली कि हार्ट बीट तेज और सीने में दर्द है, मुझे अटैक आया है। उनका इसीजी कराया गया तो रिपोर्ट नॉर्मल आई। डॉक्टर ने उनसे चर्चा की तो पता चला महिला ने इंटरनेट पर तेज हार्ट बीट होने के कारण देखे तो उसमें हार्ट अटैक बताया गया।
केस-3
28 वर्षीय बैंक कर्मी ने खांसी व बुखार की समस्या के चलते इलाज के लिए डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर की दवाएं ऑनलाइन सर्च की तो उस दवा का इस्तेमाल अलग पढ़ा। उन्होंने बिना चर्चा किए ही दवा बंद कर दी। तबीयत बिगडऩे पर दोबारा पहुंचे तो डॉक्टर को पूरी बात बताई। इसके बाद डॉक्टर ने समझाया कि कई दवाएं कई इलाज में उपयोग होती हैं। मगर इंटरनेट के भ्रम जाल में फंसने से लंग्स का इंफेक्शन पहले के मुकाबले बढ़ा पाया गया।
जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
कई लोग हमारे पास आते हैं जो कहते हैं कि लंबे समय से इन औषधियों का प्रयोग कर रहे हैं। हमने ऑनलाइन पढ़ा कि यह बेहद कारगर है, मगर हमें तो कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में उन्हें समझाना पड़ता है कि आयुर्वेदा एक विधी है जैसे एलोपैथी में कई दवाएं खाने के बाद या खाने से पहले ली जाती हैं। इसी प्रकार अलग अलग औषधि को लेने के अलग-अलग नियम होते हैं।
डॉ. नितिन उज्जलिया, आयुर्वेद विशेषज्ञ, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय
मेडिकल साइंस में हम कई दवाएं पुराने अनुभव और रिसर्च के आधार पर मरीजों को देते हैं। ऑनलाइन पढ़ने या केमिस्ट से पूछने पर अलग-अलग प्रयोग बताए जाते हैं। इसके चलते मरीज दवा नहीं खाते और अगली बार आकर शिकायत करते हैं, तब उन्हें समझाना पड़ता है। मेडिकल साइंस में 2प्लस 2 हमेशा चार नहीं होते। इसलिए डॉक्टर से ही सलाह लें।
डॉ. लोकेंद्र दवे, प्रोफेसर, रेस्पिरेटरी पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट, गांधी मेडिकल कॉलेज
Published on:
06 Sept 2023 03:47 pm
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