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भोपाल। पूरे प्रदेश की तरह राजधानी में भी छह महीने में हार्ट अटैक के मामले पांच गुना बढ़ गए हैं। इस साल मई से अक्टूबर के बीच 313 लोगों को दिल के दौरे के चलते अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आई। यह आंकड़े जेएईएस 108 एंबुलेंस की तरफ से जारी किए गए हैं। बता दें कि यह सिर्फ वे मामले हैं, जिन्हें एंबुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया गया। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि ठंड और प्रदूषण के बढऩे से दिल के लिए जोखिम बढऩे लगता है।
सबसे ज्यादा मामले हबीबगंज से
आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक मामले हबीबगंज एरिया से आए हैं। यहां 6 माह में 30 हार्ट अटैक के मामले आए हैं। इसके बाद जेपी अस्पताल के आस-पास के एरिया में 26 लोगो को दिल के दौरे के चलते भर्ती कराने की नौबत आई। साथ ही तीसरे नंबर पर 24 मामलों के साथ मिसरोद है।
उच्च रक्तचाप हृदय रोग का मुख्य कारण
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च व नेशनल सेंटर फॉर डिसीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार भारत में 28.1 फीसदी मौतें हृदय रोग के कारण होती हैं। इसी तरह 28.5 प्रतिशत वयस्क उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं। इनमें 25.7 प्रतिशत ग्रामीण व 34 फीसदी शहरी उच्च रक्तचाप के रोगी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उच्च रक्तचाप हृदय रोग के मुख्य कारणों में से एक है।
ठंड में सिकुड़ जाती हैं नसें, गाढ़ा हो जाता है खून
ठंड में हार्ट की नसें सिकुड़ती हैं, साथ ही खून भी गाढ़ा होता है। ऐसे में जिन मरीजों में पहले से ब्लॉकेज रहता है, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ठंड में हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं।
-डॉ. किसलय श्रीवास्तव, कॉर्डियोलोजिस्ट, एम्स भोपाल
निजी वाहन नहीं एम्बुलेंस का करें इस्तेमाल
हार्ट अटैक के मामले में प्रीहॉस्पिटल केयर बहुत इंपॉर्टेंट होती हैं। इसलिए लोगों को एंबुलेंस का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें सभी प्रकार के जीवन रक्षक उपकरण होते हैं साथ ही प्रशिक्षित मेडिकल कर्मचारी होते हैं।
- तरुण सिंह परिहार, सीनियर मैनेजर, जेएइएस 108 एंबुलेंस
एम्स में हाल ही में 11 महीने बाद आए कॉर्डियोलोजिस्ट
हाल ही में करीब 11 महीने बाद एम्स में कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो सकी है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. किसलय श्रीवास्तव ने एम्स पहुंचकर ओपीडी की शुरुआत भी कर दी है। ओपीडी हर सोमवार व गुरुवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगी। बीएमएचआरसी में कोरोनरी आर्टरी सर्जरी (एमआइसीएएस) प्रक्रिया से बाइपास सर्जरी हुई है। इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है। जिसके कारण जटिलताएं व दर्द कम होता है। साथ ही मरीज कम समय में अपनी आम दिनचर्या की ओर लौट जाता है। इस तकनीक से अब तक पांच मरीजों की सर्जरी हो चुकी है। बीएमएचआरसी के निदेशक डॉ प्रभा देसिकन ने बताया कि पूरे मध्यप्रदेश में बहुत कम ऐसे अस्पताल हैं, जहां एमआइसीएएस पद्धति से बाइपास सर्जरी होती है।
भोपाल में माहवार आए हार्ट अटैक के मामले
मई | 18 |
जून | 44 |
जुलाई | 59 |
अगस्त | 47 |
सितंबर | 61 |
अक्टूबर | 84 |
कुल | 313 |
सबसे अधिक मामले वाले क्षेत्र
हबीबगंज | 30 |
जेपी अस्पताल | 26 |
होशंगाबाद रोड | 24 |
बैरसिया | 22 |
अशोका गार्डन | 16 |
| बागसेवनिया | 15 |
आप भी रहें अलर्ट इन संकेतों के बाद तुरंत पहुंचे अस्पताल
अमेरिका के हावर्ड हेल्थ इंस्टीट्यूट ने एक सर्वे किया। इसमें हार्ट अटैक के कई मामलों में देखा गया है कि छोटे-छोटे संकेत आपको सिग्नल देते हैं कि आपको जल्दी से डॉक्टर के पास जाना चाहिए, लेकिन लोग इसे पूरी तरह से इग्नोर कर देते है। हार्वर्ड ने हाल ही में एक रिसर्च पब्लिश किया। यह रिसर्च उन्होंने महिलाओं पर किया जिसमें, 95 फीसदी महिलाओं ने बताया कि दिल का दौरा पडऩे के एक महीने पहले से ही सबकुछ ठीक नहीं था। इस रिसर्च में यह भी खुलासा किया गया है कि दो सबसे मामूली से दिखने वाले संकेत होते हैं जो अक्सर लोग इग्नोर कर देते हैं और वह हैं हमेशा थकान महसूस करना और नींद न आना।
हार्ट अटैक से एक महीने पहले दिखते हैं लक्षण
1. रिसर्च के मुताबिक सांस की तकलीफ, कमजोरी, रात के वक्त पसीना आना, चक्कर और उल्टी आना दिल का दौरा पडऩे के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। वहीं ज्यादातर पुरुषों में शुरुआती लक्षण के तौर पर सीने में दर्द, जकडऩ, सांस लेने की तकलीफ हो सकती है।
2. हार्वर्ड हेल्थ की रिसर्च के मुताबिक हैं, कुछ महिलाओं को अत्यधिक थकान, परेशान, नींद, या सांस की तकलीफ लगातार रहती है तो, यह दिल का दौरा पडऩे के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देने से तुरंत इसका इलाज किया जा सकता है और दिल का दौरा पडऩे से रोका जा सकता है।
3. हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक जिन महिलाओं को सीने में दर्द की शिकायत, सांस की तकलीफ, थकान, ठंडा पसीना, चक्कर आना और मतली जैसे लक्षण शरीर में दिखते हैं तो, तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
Updated on:
10 Dec 2022 01:37 pm
Published on:
10 Dec 2022 01:36 pm
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