
प्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी गणेशजी की भक्ति में डूबे नजर आए।
पूरे देश सहित एमपी में भी मंगलवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। इसी के साथ गणेशोत्सव की भी शुरुआत हो गई है। गणेश चतुर्थी पर घर घर गणेशजी की मूर्ति की स्थापना की जा रही है और लोग विधिविधान से गणेश पूजा कर रहे हैं। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर प्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी गणेशजी की भक्ति में डूबे नजर आए।
गणेश चतुर्थी के पर्व पर गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सुबह से ही माता मंदिर पहुंच गए। डॉ. मिश्रा ने यहां पूरे भक्ति भाव से माता की पूजा अर्चना की। इसके बाद गृहमंत्री घर पर गणेशजी की मूर्ति स्थापित करने के लिए बाजार पहुंचे।
डॉ.मिश्रा ने यहां भगवान गणेश की मूर्ति पसंद की। उन्होंने भगवान गणेश की विशेष रूप से मिट्टी से निर्मित मूर्ति पसंद की। खास बात यह है कि गृहमंत्री ने गणेशजी की मूर्ति को पूरे श्रद्धा भाव से अपने माथे पर रखा। उन्होंने मूर्ति घर लाकर विधि विधान से गणेशजी की पूजा अर्चना की।
गौरतलब है कि राजधानी भोपाल में इस साल गणेशोत्सव पर खास तैयारियां की गई हैं। गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2023) के दिन मंगलवार, 19 सितंबर 2023 से गणेशोत्सव प्रारंभ होगा। उत्सव का समापन अनंत चतुर्थी गुरुवार, 28 सितंबर 2023 के दिन होगा। इसी दिन बप्पा की मूर्ति का विर्सजन किया जाएगा।
गणेश चतुर्थी 2023 के मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2023 Auspicious time)
गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की स्थापना शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। ऐसा करने से शुभ और लाभ की प्राप्ति होती है। साथ ही गौरी पुत्र श्री गणेश परिवार के सभी प्रकार के दुखों को दूर कर देते हैं।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारंभ – सोमवार 18 सितंबर 2023, दोपहर 12.39
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का समापन – मंगलवार 19 सितंबर 2023, दोपहर 01.43
गणेश स्थापना समय – मंगलवार 19 सितंबर 2023 को सुबह 11.07 – दोपहर 01.34
सर्वाधिक शुभ- 11:27 AM से 12:16 PM (19 सितंबर 2023)
गणेश चतुर्थी पूजा विधि-
प्रथम पूज्य गणपतिजी की मूर्ति की गणेश चतुर्थी पर स्थापना करने से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ—सफाई कर लेनी चाहिए।
इसके पश्चात पूजा की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछा लेना चाहिए, अब शुभ मुहूर्त में पूर्व दिशा की ओर में मुख करते हुए गणपतिजी को चौकी पर स्थापित करना चाहिए।
अब दूर्वा से गणेशजी पर गंगाजल छिड़कने के बाद उन्हें हल्दी, चावल, चंदन, गुलाब, सिंदूर, मौली, दूर्वा,जनेऊ, मिठाई, मोदक, फल, माला और फूल अर्पित करने चाहिए।
इसके बाद भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा की जानी चाहिए। फिर लड्डू या मोदक का भोग लगाने के पश्चात उनकी आरती उतारें।
जानिए क्यों मनाते हैं 10 दिवसीय गणेश उत्सव
गणेश चतुर्थी के दिन शंकर और पार्वती माता के पुत्र प्रथम पूज्य श्रीगणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गणेश उत्सव के तहत जो कोई बप्पा की विधि विधान से 10 दिन तक पूजा अर्चना करता है उसके समस्त कार्य सिद्ध होने के साथ ही सफल होते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत की रचना के लिए महर्षि वेदव्यासजी ने गणेश जी का आह्वान किया था। व्यास जी श्लोक बोलते गए और गणपतिजी बिना रुके महाभारत को लिपिबद्ध लिखते गए। 10 दिन तक महाभारत को लिपिबद्ध करने के दौरान गणेशजी पर धूल मिट्टी की परत जम गई। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा ने सरस्वती नदी में स्नान कर खुद को स्वच्छ किया, जिसके बाद से ही भगवान गणेश का ये उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है।
Published on:
19 Sept 2023 09:27 am

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