राष्ट्रपति रहते हुए वे इतने असहाय थे कि वे प्रधानमंत्री से भी नहीं मिल पाए। डॉ शर्मा 1992-97 तक देश के राष्ट्रपति रहे। एक इस साल मार्केट में आई एक पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब बाबरी ढांचा ढहाने के लिए कार सेवकों ने चढ़ाई कर दी थी, उस समय मदद के लिए समाजसेवियों और मुस्लिम नेताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय में फोन किया तो वहां से कोई राहत नहीं मिल पाई थी। तत्काल यह लोग राहत के लिए राष्ट्रपति डा. शर्मा के पास पहुंच गए, लेकिन उनसे मिलने वाले लोग यह देखकर हैरान थे कि उनके सामने देश का राष्ट्रपति फूट-फूटकर रो रहा है। वे सभी लोग बाबरी ढांचे के मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करने आए थे। इस पर डा. शर्मा ने उन्हें एक पत्र दिखाया, जो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लिखा था।