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एक वाकया ऐसा भी: जब राष्ट्रपति रो रहे थे और प्रधानमंत्री सो रहे थे!

भोपाल। देश में कभी-कभी ऐसा वक्त भी आता है, जब इतने बड़े ओहदे पर बैठे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी असहाय हो जाते हैं। ऐसा ही वक्त 6 दिसंबर 1992 को आया था जब अयोध्या में बाबरी ढांचा ढहाया जा रहा था। दिल्ली में बैठे देश के राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा फूट-फूटकर रो रहे थे […]

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Manish Geete

Dec 26, 2015

babri masjid

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भोपाल। देश में कभी-कभी ऐसा वक्त भी आता है, जब इतने बड़े ओहदे पर बैठे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी असहाय हो जाते हैं। ऐसा ही वक्त 6 दिसंबर 1992 को आया था जब अयोध्या में बाबरी ढांचा ढहाया जा रहा था। दिल्ली में बैठे देश के राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा फूट-फूटकर रो रहे थे और प्रधानमंत्री नरसिम्हराव अपने बंगले में सो रहे थे। शर्मा बाबरी ढांचे का विध्वंस रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहते थे, लेकिन उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी।

देश के चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले भारत के नौवे राष्ट्रपति थे डॉ. शंकर दयाल शर्मा। उनके कार्यकाल में देश में ऐतिहासिक घटनाक्रम हुए जिसे आज भी लोग याद करते हैं। बाबरी ढांचे का विध्वंस उनमें से एक था।

क्या हुआ था उस वक्त
राष्ट्रपति रहते हुए वे इतने असहाय थे कि वे प्रधानमंत्री से भी नहीं मिल पाए। डॉ शर्मा 1992-97 तक देश के राष्ट्रपति रहे। एक इस साल मार्केट में आई एक पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब बाबरी ढांचा ढहाने के लिए कार सेवकों ने चढ़ाई कर दी थी, उस समय मदद के लिए समाजसेवियों और मुस्लिम नेताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय में फोन किया तो वहां से कोई राहत नहीं मिल पाई थी। तत्काल यह लोग राहत के लिए राष्ट्रपति डा. शर्मा के पास पहुंच गए, लेकिन उनसे मिलने वाले लोग यह देखकर हैरान थे कि उनके सामने देश का राष्ट्रपति फूट-फूटकर रो रहा है। वे सभी लोग बाबरी ढांचे के मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करने आए थे। इस पर डा. शर्मा ने उन्हें एक पत्र दिखाया, जो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लिखा था।

डा. शर्मा ने पत्र में नरसिम्हा राव से कहा था कि उत्तरप्रदेश सरकार को बर्खास्त कर सुरक्षा व्यवस्था को केंद्र सरकार अपने हाथों में ले ले। फिर शर्मा ने आसपास मौजूद लोगों से कहा कि मैं भी प्रधानमंत्री राव तक नहीं पहुंच पाया हूं।

नरसिम्हा राव कर रहे थे आराम
कहा जाता है कि डा. शर्मा ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार किया था, तभी नरसिम्हाराव को यह पद मिल गया था। उस समय डा. शर्मा अस्वस्थ्य रहते थे। हालांकि 2013 में समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह के एक बयान ने सभी को चौंका दिया था कि राष्ट्रपति को बाबरी ढांचा गिराए जाने की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इस बयान पर विवाद भी हुआ था।

भोपाल में हुआ था जन्म
शर्मा का जन्म भोपाल में हुआ था। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में एमए किया और एलएलएम की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विवि से लॉ में Phd की। 1940 में वे स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ गए और कांग्रेस की सदस्यता ली। सन 1952 में वे भोपाल प्रदेश के चीफ मिनीस्टर भी बने और 1956 में जब मध्यप्रदेश का गठन हुआ तब तक शर्मा ही यहां के सीएम थे। इसके बाद वे 1972-74 तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में वे संचार मंत्री बने।

(राष्ट्रपति भवन में स्थापित खुद की प्रतिमा देखकर हैरान रह गए थे डा. शंकर दयाल शर्मा।)


(ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर के साथ भारतीय राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा।)


(मुंबई में एक लाइब्रेरी के शुभारंभ करने पहुंचे डा. शंकर दयाल शर्मा।)


Dr Shankar Dayal Sharma
(राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा ने 10वें प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी को शपथ दिलाई थी।)