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पहले ही था शक, हादसा नहीं साजिश का शिकार हुई थी इंदौर पटना एक्सप्रेस

लगातार हुए दो हादसों के बाद शक जताया जा रहा था कि कानपुर के पास पुखरायां के हुआ बड़ा रेल हादसा और उसके बाद रूरा रेलवे स्टेशन के पास हुए दूसरा हादसा भी कहीं किसी साजिश का नतीजा तो नहीं थे? 

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rishi upadhyay

Jan 18, 2017

indore patna express

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भोपाल। लगभग 1500 यात्रियों से भरी इंदौर पटना एक्सप्रेस बीते साल 20 नवम्बर की सुबह हादसे का शिकार हो गई। 150 से ज्यादा की मौत और सैंकड़ों के घायल होने के कारण बनी ये घटना पिछले 6 सालों में सबसे बड़े रेल हादसे के तौर पर सामने आई। घटना के फौरन बाद हादसे के कारणों पर ध्यान देना शुरू किया गया। कई अधिकारियों को सस्पेंड करने के साथ ही घटना की सारी कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।


इससे पहले कि किसी नतीजे पर पहुंचा जाता, कानपुर के नजदीक ही एक और हादसा हो गया। इन लगातार दो हादसों के बाद कुछ ऐसे फैक्ट्स सामने आए थे, जिनसे इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि कानपुर के पास हुआ इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसा के पीछे कोई साजिश रची गई थी।



train accident



दो दिन पहले ही 1 जनवरी की रात कानपुर स्टेशन के पास दो ट्रैकमेन्स ने उत्तर पूर्व रेलवे के तहत कल्याणपुर और मंधाना रेलवे स्टेशनों के बीच में 3 जोड़ी फिश प्लेट फटी हुई पाई गई। रेलवे पटरियों को काटा गया था। ट्रैक पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैकमेन संजीव कुमार और रामराज ने पटरियों से 50 क्लिप्स को उखड़ा हुआ पाया और साथ ही में 3 जोड़ी फिश प्लेट फटी हुई पाईं।




ट्रैकमैन के मुताबिक, उन्होंने कुल्हाड़ी से रेल पटरी को काटे जाने का निशान भी पाया. इसकी जानकारी तुरंत ही रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को दी गई। रेलवे कर्मचारियों ने आनन-फानन में पटरी को दुरुस्त किया और बिठूर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। आरपीएफ ने रेलवे एक्ट की धारा 153 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।


train accident

इस मामले पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु पहले ही कह चुके हैं कि पुखरायां रेल हादसे में ज्यादा लोगों की मौत के पीछे रोलिंग स्टॉक में बरती गई लापरवाही नजर आ रही है। फिलहाल जांच जारी है और पूरी जानकारी उसके बाद ही मिल पाएगी। लेकिन दूसरे हादसे के बाद सामने आई जानकारी के बाद शक जताया जा रहा था कि कानपुर के पास पुखरायां के हुआ बड़ा रेल हादसा और उसके बाद रूरा रेलवे स्टेशन के पास हुए दूसरा हादसा भी कहीं किसी साजिश का नतीजा तो नहीं थे?



आस पास हुए 38 दिनों में 2 बड़े रेल हादसे
मामले में जान-बूझकर ट्रेन एक्सीडेंट करवाने का शक इसलिए पैदा हुआ क्योंकि महज 38 दिनों के भीतर ही कानपुर के नजदीक 2 बड़े ट्रेन हादसे हुए थे। इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे के 38 दिन के बाद ही अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस, कानपुर ग्रामीण के रूरा रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गई थी।


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ये दोनों ही रेलवे ट्रैक काफी सेफ माने जाते हैं। झांसी-कानपुर ट्रैक पर ट्रेनों की रफ्तार बहुत अधिक नहीं है, दूसरा यहां पर मिट्टी धंसने या किसी अन्य कारण से पटरी को नुकसान पहुंचने की सम्भावनाएं कम ही हैं। हालांकि इस हादसे को लेकर ट्रेन के ड्राइवर ने अपना स्टेटमेंट दिया था कि ओएचई में धमाका होने के कारण उसे इमरजेंसी ब्रेक लगाने पड़े। लेकिन उसके बाद हुआ अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस हादसा और उसके बाद सामने आए एक पहलू ने संदेह का दायरा बढ़ा दिया है।



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इंदौर-पटना एक्सप्रेस और अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस, दोनों ही ट्रेनों के साथ हुए हादसे जिन ट्रैक्स पर हुए हैं, उन्हें काफी सेफ माना जाता है। झांसी कानपुर ट्रैक के बारे में हम पहले बता चुके हैं, वहीं रूरा के पास हुआ हादसा जिस ट्रैक पर हुआ है, शताब्दी और राजधानी ट्रेनें तेज स्पीड पर चला करती है और इस ट्रैक का मेंटेनेंस लगातार किया जाता रहा है।


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ऐसे में ये बात रेलवे अफसरों के गले नहीं उतर रही कि यहां किस तरह से ट्रेन पटरी से उतर गई। हालांकि इस रेल हादसे की जांच कमिश्नर रेलवे सेफ्टी कर रहे थे लेकिन रेलवे के अधिकारी दबी जुबान से ही सही इस बात का संदेह जता रहे थे कि इस रेल हादसे में अराजक तत्वों के हाथ की भी जांच की जानी चाहिए।

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