
भोपाल. अगर आप कार्बाइड से पके केला खाने के आदी हैं तो यह आपको मिर्गी का मरीज बना सकती है। वीडियो ईईजी शोध में यह खुलासा हुआ है. डॉक्टरों के अनुसार केले को पकाने के लिए कार्बाइड टॉक्सिन का इस्तेमाल होता है। इस केमिकल की ज्यादा मात्रा दिमाग में पहुंचने से दौरे पडऩे लगते हैं। सिर्फ केले से नहीं बल्कि गेहूं की रोटी खाने से भी यह रोग हो सकता है। इसके अलावा नवजात शिशु में, यह जन्म दोष या प्रसव के दौरान रोने में देरी से ऑक्सीजन की समस्या के कारण हो सकता है।
दरअसल, एक पांच साल के बच्चे को मिर्गी की समस्या थी। डॉक्टरों ने मिर्गी की वजह जानने के लिए वीडियो ईईजी जांच कराने की सलाह दी। इस दौरान जैसे ही बच्चे ने केला खाया उसे दौरा पडऩा शुरू हो गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बच्चे के दिमाग में कार्बाइड टॉक्सिन की मात्रा बढ़ गई थी इसी तरह एक अन्य सात साल के बच्चे में गेहूं की रोटी खाने से दौरे पडऩे शुरू हो जाते थे। इन मामलों में मरीजों को जिस वजह से दौरे पड़ रहे हैं, उससे दूर रहने की सलाह दी जाती है।
इस तरह से काम करती हैं वीडियो ईईजी
वीडियो ईईजी में 24 घंटे के लिए व्यक्ति का वीडियो रिकॉर्ड किया जाता है। साथ ही ईईजी परीक्षण के जरिए दिमाग की तरंगों में हुई हलचल भी देखी जाती हैं। इससे पता चलता है कि किस वजह से मरीज को मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं।
देश में 20 लाख एपिलेप्सी के मरीज
भारत में एक अनुमान के हिसाब से 20 लाख एपिलेप्सी यानी मिर्गी के मरीज हैं। इनमें से ज्यादातर में मिर्गी की सही वजह का पता नहीं लग पाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मिर्गी की कई वजह हो सकती हैं। इनमें गेहूं की रोटी, केला, आनुवांशिक, जन्म के समय बच्चे के रोने में देरी, सिर पर लगी चोट या किसी तरह का संक्रमण हो सकता है। खास बात यह है कि इसका उम्र, जेंडर और आर्थिक स्थिति से कोई लेना-देना
नहीं होता है।
मिर्गी से जुड़ी खास बातें
ज्यादातर 10 साल से कम उम्र के बच्चों में सामने आते हैं। मगर बुजुर्गों में भी इसके दौरे देखे जाते हैं।
मिर्गी के दौरे दिल की बीमारी पर भी असर डाल सकते हैं।
यदि दौरे अधिक आते हैं तो इससे सीखने.समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।
हर दौरे की वजह मिर्गी नहीं होती। डॉक्टर से बात करें ताकि सही वजह का पता चल सके।
दवाएं, सर्जरी, खानपान और दूसरे कई तरह के इलाज से मिर्गी ठीक हो सकती है।
80 फीसदी मरीजों का इलाज दवाओं से ही हो जाता है। 20 प्रतिशत मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
मिर्गी मस्तिष्क की संरचनात्मक असमानताओं से भी होती है। ऐसे में ब्रेन सर्जरी करनी पड़ती है। इसके लिए सटीक प्रभावित स्थान का पता लगाना बेहद जरूरी है।
हमीदिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ आयुष दुबे के अनुसार मिर्गी के दौरे आने के कई कारण होते हैं। हाल ही में एक बच्चे में केले के अधिक सेवन से भी दौरे पड़ते थे। केले को पकाने के लिए कार्बाइड टॉक्सिन का इस्तेमाल होता है। इस केमिकल की ज्यादा मात्रा दिमाग में पहुंचने से बच्चे में दौरे पड़े। इसका पुष्टीकरण वीडियो ईईजी जांच के जरिए हुआ।
Published on:
17 Nov 2022 08:43 am
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