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बड़े होटल्स नहीं, अब लोगों को भा रहा है गांव घूमना, ट्रैकिंग से लेकर कैंपिंग का मिलेगा मजा

- ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड प्रदेश में 16 नई साइट्स विकसित करेगा....

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भोपाल। पर्यटकों को अब बड़े होटल्स में छुट्टी बिताने से ज्यादा गांवों में पर्यटन करना भा रहा है। ऐसे में ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड प्रदेश में 16 नई साइट्स विकसित करेगा। इस पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यहां पर्यटक महुए की महक का आनंद ले सकेंगे तो आदिवासी संस्कृति से भी रू-ब-रू होने का मौका मिलेगा।

प्रकृति के बीच रहने का होगा अहसास

पर्यटक गांव में ट्रैकिंग से लेकर कैंपिंग तक का आनंद ले सकेंगे। बोर्ड जंगल के पास कैंप सिटी तैयार करेगा। संचालन ग्राम समितियां करेंगी। ग्रीन स्ट्रक्चर कॉन्सेप्ट पर तैयार कैंप साइट में सस्टेनेबिलिटी का ध्यान रखा जाएगा। ये ग्लोबल सस्टेनेबल टूरिज्म काउंसिल के मापदंड के अनुसार तैयार होंगे। बोर्ड की सीइओ डॉ. समिता राजौरा के अनुसार स्ट्रक्चर तैयार करने में चूना, गारा, पत्थर और बांस का इस्तेमाल होगा। पर्यटकों को प्रकृति के बीच रहने का अहसास होगा।

कैंपिंग साइट प्लास्टिक फ्री होगी। यहां वेस्ट मैनेजमेंट का भी ध्यान रखा जाएगा, ताकि गांव या जंगल में गंदगी ना हो। इसके लिए ग्रामीणों को प्रकृति संरक्षण के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। कैंपिंग साइट सोलर ऊर्जा से ही रोशन होगी। ग्राम समितियां सामुदायिक मॉडल पर काम करेंगी।

पर्यटन यहां

जानकारी के अनुसार भोपाल के पास बोधा खो, खंडवा के पास चारखेड़ा, मदनी, रजूर, गुंजारी टापू, कूनो नेशनल पार्क, धार जिले में ग्राम पाडल्या, राजगढ़ जिले में हनुमानगढ़ी, सिवनी में पेंच टाइगर रिजर्व के पास गोरखपुर, पचमढ़ी के पास, इंदौर के पास उमरीखेड़ा में ग्रामीण पर्यटन कर सकेंगे। इसी तरह रातापानी अभयारण्य में ईको पर्यटन योजना के तहत नेचरट्रेल शुरू होगी। पर्यटक लगभग10 किलोमीटर लंबे ट्रैक परप्रकृति का आनंद ले सकेंगे।