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शिक्षा हब के रूप में पहचान बन रहे भोपाल में अब उच्च शिक्षा के लिए पुणे, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद एवं राजस्थान की तरह कई बड़े विश्वविद्यालय एवं कोचिंग संस्थान हैं, लेकिन सरकार का इन कोचिंग संस्थानों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं है। जिम्मेदारी तय न होने के कारण कोई विभाग इनकी मॉनीटरिंग नहीं करता। ऐसे में राजधानी में बिना रोक-टोक गली-गली में कोचिंग संस्थान चल रहे हैं।
फैकल्टी के लिए भी किसी प्रकार के मानक तय नहीं है। जबकि राजस्थान सहित अन्य राज्यों में कोचिंग संस्थानों के लिए गाइडलाइन तय है। इसका पालन न करने पर समय-समय पर उन पर कार्रवाई भी होती हैं।
स्थिति यह है कि नीट, जेईई एवं यूपीएससी की तैयारी कराने वाले कुछ कोचिंग संस्थानों की फीस दो से तीन लाख तक है, लेकिन इंतजाम के नाम पर एक-एक कमरे में 200 से 300 छात्रों को बैठाया जाता है। स्पीकर के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। कहीं-कहीं तो कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था तक नहीं होती और न ही सुरक्षा आदि के कोई इंतजाम होते हैं।
अन्य प्रदेशों के विद्यार्थी भी बढ़े
राजधानी में अब केवल कॉलेज या विश्वविद्यालयों में ही नहीं बल्कि कोचिंग संस्थानों में भी अन्य प्रदेशों से आने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। अच्छे माहौल, सुविधाएं और पढ़ाई के सपने संजोकर यह छात्र भोपाल आते हैं, लेकिन सुविधाओं को देखकर खुद को ठगा सा महसूस करते हैं।
इन नियमों की जरूरत
● रिहायशी संपत्ति में कुल प्लॉट के दो तिहाई हिस्से में ही निर्माण हो सकता है।
● जहां कोचिंग सेंटर चल रहा है वहां कन्वर्जन चार्ज वसूला जाए।
● जहां 50 से अधिक लोग एकत्रित हों, वहां फायर उपकरण आवश्यक हैं।
● एक कक्ष में अधिकतम कितने लोग बैठ सकते हैं इसकी संख्या तय हो।
● पार्किंग व्यवस्था अनिवार्य रूप से हो।
वर्तमान में स्थिति
● एक बिल्डिंग में पांच से छह कोचिंग संस्थान संचालित किए जाते हैं, पार्किंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं।
● रिहायशी संपति की ऊंचाई 15 मीटर से ज्यादा न होने का हवाला देकर फायर एनओसी से बचने की कोशिश होती है।
● एक कक्षा में 200 से 300 छात्रों को पढ़ाया जाता हैं। भीड़ में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।
एक्सपर्ट व्यू
स्कूल-कॉलेजों की तरह कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण के लिए भी कमेटी का गठन होना चाहिए। जिसमें एक चेयरमैन एवं कम से कम तीन सदस्य होना चाहिए, जो समय-समय पर जाकर कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करें। यह देखा जाए कि एक कमरे में कितने बच्चे बैठ सकते हैं। फायर सेफ्टी है या नहीं है। फीस और फैकल्टी का स्ट्रक्चर क्या है। आने-जाने के रास्ते कितने हैं।
-डॉ. राजेश श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष , श्यामाप्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय
Updated on:
11 Jan 2024 02:31 pm
Published on:
11 Jan 2024 02:14 pm
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