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इनसे सीखें, कैसे जीतनी है ‘कोरोना से जंग’, 40% संक्रमण के बाद भी नहीं मानी हार

कैंसर मरीज होने के कारण डॉक्टर भी उम्मीद छोड़े बैठे थे, लेकिन दृढ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर जीती जंग....

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coronavirus

भोपाल। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। यदि मन में दृढ़ जीवटता (Patrika Positive News) है तो उम्र और बीमारियां मायने नहीं रखती, ऐसा व्यक्ति निश्चित तौर पर गंभीर बीमारियों पर भी विजय पा लेता है। इसका जीता जागता प्रमाण हैं 76 वर्षीय कालिका प्रसाद मिश्रा।

उनका तीन बार कैंसर का ऑपरेशन हो चुका है। उन्होंने तीन कैंसर को हराया। उन्हें कोरोना का भी संक्रमण हो गया था। बुजुर्ग और कैंसर मरीज होने के कारण डॉक्टर भी उम्मीद छोड़े बैठे थे, लेकिन दृढ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर 10 दिन में ही कोरोना को हराकर वह अस्पताल से घर आ गए ।

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बोल भी नहीं सकते

वे मिश्रा लोक निर्माण विभाग में अधीक्षण यंत्री पद से रिटायर्ड हुए हैं। उन्हें नौकरी के दौरान ही 30 साल पहले लैरिंग्स का कैंसर हुआ था । उस समय ऑपरेशन के दौरान उनका स्वर यंत्र यानी वोकल कॉर्ड निकाल दिया गया था, तब से वे बोल भी नहीं सकते, लेकिन उन्होंने कैंसर से जूझते हुए अपनी नौकरी पूरी की और इस कैंसर को हरा दिया।

10 दिन में कोरोना को हराया

इसके बाद वर्ष 2020 में उन्हें फिर दो कैंसर ने जकड़ लिया। उन्होंने हार नहीं मानी और इनकी भी सर्जरी कराई और उसके बाद एक महीने तक रेडिएशन थैरेपी चली। इससे काफी कमजोरी आ गई, लेकिन उन्होंने फिर कैंसर को हराया। इस साल अप्रैल में उन्हें कोरोना संक्रमण हो गया। फेंफड़े 40 प्रतिशत संक्रमित हो गए। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर भी आशंकित थे, लेकिन मिश्रा इससे बिल्कुल नहीं डरे । 10 दिन में कोरोना को हराकर अस्पताल से अपने घर आ गए।