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यूरिया के बाद अब यहां मंडराने वाला है बिजली संकट, कोयले ने बढ़ाई सरकार की चिंता

यूरिया के बाद अब यहां मंडराने वाला है बिजली संकट, कोयले ने बढ़ाई सरकार की चिंता

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यूरिया के बाद अब यहां मंडराने वाला है बिजली संकट, कोयला बना सरकार की चिंता

भोपालः मध्य प्रदेश में अब तक खाद आपूर्ति को लेकर मचा बवाल पूरी तरह शांत हुआ भी नहीं था कि, सरकार के सामने आने वाले समय में बिजली की कमी की समस्या खड़ी होने लगी है। इसके पीछे कारण यह है कि, प्रदेश में अब तक जितने भी थर्मल पावर प्लांट हैं, उन्हें चलाने के लिए मात्र दो दिनों का ही कोयला शेष रह गया है। ऐसे हालात में प्रदेश के बड़े इलाके को आगामी दिनो में बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

लोगों पर पड़ेगी मेहंगाई की मार

इस समय प्रदेश की कमलनाथ सरकार सूबे के किसानों को खाद मुहय्या कराने की व्यवस्था करने में जुटी हुई है ताकि, किसानों के सामने सुगम खेती के हालात बने रहें। अगर खेतों में खाद नहीं होगा तो फसल पैदावार में कमी आएगी और अगर फसल में कमी आएगी तो, तय समय में मांग पूर्ति नहीं हो पाएगी, जिससे फल-सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी होगी। यानि प्रदेश की जनता को महंगाई की मार झेलना पड़ेगी। इसी के मद्देनज़र पेरदेश सरकार पूरी कोशिश करते हुए किसानो के लिए पर्याप्त खाद की व्यवस्था करने में जुटी हुई है, ताकि प्रदेश को मेहंगाई की मार ना झेलना पड़े। ऐसे में अगर प्रदेश में बिजली संकट बढ़ता है तो सरकार के सामने इससे पार पाना बड़ी चुनौती बन जाएगा। कोयले की कमी के कारण पावर प्लांट में बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। प्रदेश के ज्यादातर थर्मल पावर प्लांटों में अब सिर्फ एक से दो दिन का कोयला ही शेष रह गया है।

बिजली कंपनियों का दावा

आपको बता दें कि, वैसे ही ही रबी सीजन में बिजली की मांग ज्यादा होती है। इस समय तेरह हजार मेगावाट के आसपास बिजली की मांग सामने आ रही है। हालांकि, बिजली कंपनियां पर्याप्त बिजली की लगातार आपूर्ति करते रहने का दावा तो कर रही हैं, लेकिन अगर इन थर्मल पावर प्लांटों में पर्याप्त कोयला नहीं होगा तो बिजली की कमी आना तय है, जिससे प्रदेश में बड़ा बिजली संकट खड़ा होना स्वभाविक है।

प्रदेश में कोयले के स्टॉक की स्थिति

अगर मध्य प्रदेश में कोयला भंडारण पर गौर करें तो, अमरकंटक पावर प्लांट इस समय 49,580 मीट्रिक टन कोयला शेष है। इसके अलावा सतपुड़ा पावर प्लांट 22,706 मीट्रिक टन कोयला बचा है। वहीं, बिरसिंहपुर पावर प्लांट में 24,940 मीट्रिक टन कोयला बाकि है। साथ ही, सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में 30,855 मीट्रिक टन कोयला बचा हुआ है, जिसका इस्तेमाल आगामी एक से दो दिनो तक बिजली उत्पादन में किया जा सकता है।

एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे पक्ष-विपक्ष

एक तरफ जहां कांग्रेस मोर्चा संभालते ही चीजों को व्यवस्थित करने के भार से गुज़र रही है, तो वहीं प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए नवनिर्वाचित सरकार की प्रशासनिक क्षमताओं पर सवाल खड़े करने शुरु कर दिए हैं। इधर कांग्रेस ने भी प्रदेश में फैली अव्यवस्थाओं का ठीकरा प्रदेश की पिछली और केन्द्र सरकार पर फोड़ना शुरु कर दिया है। कांग्रेस की ओर से खाद के बाद बिजली के लिए जरुरी कोयला नहीं मिलने पर केंद्र सरकार पर भेदभाव की राजनीति करने का आरोप लगाया है। अब देखना ये है कि, एक दूसरे पर अव्यवस्थाओं का ठीकरा फोड़ने वाली केन्द्र और राज्य सरकार प्रदेश की अव्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने के लिए क्या कठोर कदम उठाती हैं।