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बच्चों की परीक्षा, डिप्रेशन में परिजन, बच्चे खुद ले जाकर करा रहे उनकी काउंसलिंग

मनोचिकित्सक ऐसे मामलों पर कहते हैं कि अभिभावकों की अपेक्षा रहती है कि उनकी संतान परीक्षा में अच्छे से अच्छे नंबर लाए।

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भोपाल. अभी 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। बच्चे पढ़ाई में जुटे हुए हैं। लेकिन इन परीक्षाओं का तनाव बच्चों को कम उनके माता-पिता को ज्यादा हो रहा है। प्रतियोगी दौर में वे अपने बच्चे को सबसे आगे देखना चाहते हैं। हालत यह हो गई है कि एक पेपर भी थोड़ा गड़बड़ाने पर परिजन डिप्रेशन में पहुंच रहे हैं। ऐसे में बच्चे पढ़ाई छोड़कर उनका इलाज कराते फिर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में पांच बच्चे अपने माता-पिता को लेकर मनोचिकित्सक के पास काउंसलिंग के लिए पहुंचे।

अभिभावकों का चिंतित चेहरा देख बच्चों को और अधिक तनाव होगा

12 वी क्लास का स्टूडेंट माता पिता के साथ काउंसलिंग के लिए आया। बच्चे ने मनोचिकित्सक को बताया कि एग्जाम शुरू होते ही घर में माता-पिता व उसके बीच लड़ाईयां होने लगीं। दरअसल बच्चे के सोने से लेकर खाने-पीने को लेकर मां अधिक सख्त हो गई हैं। यदि वह 5 मिनट भी लेट सो कर उठता है तो चिल्लाने लगती हैं। ऐसे में पिता के समझाने पर उन दोनों के बीच लड़ाई होने लगती है। यह स्थिति तब है जबकि आज तक के एग्जाम में हमेशा 90 फीसदी से अधिक अंक आए हैं।

48 साल की महिला को पहले से तनाव व अवसाद की समस्या थी। इलाज के बाद पिछले डेढ़ साल से वह बिलकुल ठीक थीं। मगर दोनों बच्चों के एग्जाम शुरू होने के बाद से महिला न ठीक से सो रहीं हैं और दिन भर खोई-खोई रहने लगी है। एक बच्चा 10 वीं और दूसरी 12 वीं में हैं। महिला के बच्चों पर दिन भर नजर रखने, बार-बार तैयारी को लेकर सवाल-जवाब करने, उनके फोन उनसे छीन लेने और दोस्तों से बात भी सामने करने को कहने से विवाद हो रहे हैं। जिस वजह से बच्चे पढ़ाई से अधिक घर में हो रही लड़ाईयों के चलते तनाव में हैं।

म नोचिकित्सक ऐसे मामलों पर कहते हैं कि अभिभावकों की अपेक्षा रहती है कि उनकी संतान परीक्षा में अच्छे से अच्छे नंबर लाए। इसी के चलते वे अनजाने में बच्चों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल देते हैं। जिसके चलते उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती। ऐसे में परीक्षा में असफल होने या अभिभावकों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरने पर विद्यार्थी गलत कदम भी उठा लेते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को यह जरूर कहें कि हम जानते हैं कि तुम परीक्षा में अच्छी परफॉरमेंस के लिए तैयार हो। अपनी तरफ से अच्छा करो। तुम्हारा जैसा भी परीक्षा परिणाम आएगा, हमें मंजूर है। अभिभावकों का चिंतित चेहरा देखकर बच्चे और अधिक तनाव होगा।

यह बोले एक्सपर्ट

पैरेंट में कई बार एंग्जायटी डिसऑर्डर या पर्सनालिटी में समस्याएं होती हैं जो तनावपूर्ण स्थितियों में उभरकर सामने आती हैं। कई स्टूडेंट्स आते हैं जो कहते हैं एग्जाम के समय पढ़ाई से ज्यादा पैरेंट को डील करना मुश्किल होता है।

-डॉ सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक