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जानें कैशलेस-हाईटेक एमपी का सच

पत्रिका ने पड़ताल में खुली सरकारी विभागों की पोल...

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sanjana kumar

Dec 29, 2016

cashless system: public opinion, the tradition of

cashless system: public opinion, the tradition of savings

भोपाल। सरकार निजी संस्थानों के साथ ही खुद को अत्याधुनिक, हाईटेक, कैशलेस करने के तमाम दावे कर रही है, लेकिन जमीन पर फिलहाल ये पूरी तरह सफल होते नजर नहीं आ रहे। पत्रिका ने पड़ताल की तो पता चला, इसी माह प्रदेश में करीब 10 हजार एेसे लघु व सूक्ष्म उद्यम रहे, जिन्होंने आदेश के बावजूद कर्मचारियों को बैंक खातों में भुगतान नहीं किया। अब भी सरकार के 20 से अधिक एेसे सेंटर व विभाग हैं, जहां कैशलेस तो दूर कम्प्यूटर तक नहीं हैं।

सरकारी विभाग-केंद्र जहां मैन्यूअल हो रहा देन-लेन

नापतौल विभाग : सीधा जनता से जुड़ा हुआ विभाग। नियमों में गड़बड़ी करने वालों के प्रकरण बनाते हैं। कम्पाउंडिंग करने वालों से नकद भुगतान लेते हैं, लेकिन राशि जमा करने कार्यालय में कम्प्यूटर तक नहीं है। पुराने ढर्रे पर रसीद से ही पर्ची फाड़कर पैसा जमा कराते हैं।

खाद्य विभाग : ईदगाह हिल्स स्थित खाद्य एवं औषधि विभाग का कार्यालय व प्रदेश की लैब भी है, लेकिन नमूने की जांच कराना हो तो 10 रुपए की रसीद कट्टे से पर्ची ही फाड़ी जाएगी। यहां कोई कम्प्यूटर नहीं है, जिससे ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जा सके या पर्ची फाड़ी जा सके।

मत्स्य विभाग : मत्स्य पालन से जुड़े कारोबारी विभाग से मछली के बीज लेने से लेकर अन्य सामग्री लेने पहुंचते हैं। विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने भी आते हैं और कुछ भुगतान भी करते हैं। पूरा भुगतान मैन्यूअली ही किया जाता है।
पशुधन कुक्कुट विकास निगम:यहां पशुओं के बीमा से लेकर योजनाओं का लाभ लेने के काम होते हैं। हालांकि, यह ऑनलाइन कॉल सेंटर से जुड़ा है, लेकिन लेन-देन के लिए पूरा काम मैन्यूअल ही है।

सरकारी स्कूल : शिक्षा विभाग भले ही पूरी तरह हाईटेक हो, लेकिन स्कूलों में फीस और अन्य भुगतान का पूरा काम मैन्यूअल ही होता है। मॉडल स्कूल तक में यही हाल है।

सीपीए : राजधानी परियोजना प्रशासन में सूचना का अधिकार से लेकर ठेकेदारों के लेन-देन की जानकारी तक मैन्यूअल तरीके से ही होती है। यहां भी हाईटेक व कंप्यूटर से कोइ्र काम नहीं होता है।

50 हजार उद्योग, ढाई लाख कर्मचारी

जिन 10 हजार उद्योगों ने कर्मचारियों को बैंक खातों में भुगतान नहीं किया, वित्त संचालनालय की ओर से पूछताछ की गई। फिलहाल नसीहत से ही काम चलाया गया। सरकार ने वेतन का भुगतान कर्मचारियों को बैंक खातों में ही करने के निर्देश जारी किए हुए हैं। प्लास्टिक सामग्री बनाने वाली कंपनी संचालित करने वाले भोपाल के उद्यमी हरीश नवलानी का कहना है कि मैंने जवाब दिया कि बैंकों में भीड़ के कारण कर्मचारियों के खाते नहीं खुलवाए जा सके। प्रदेश में फिलहाल 48189 लघु एवं सुक्ष्म उद्यम पंजीकृत हैं। सालाना 6171 करोड़ इनका टर्नओवर है। इनसे 2.50 लाख कर्मचारी जुड़े हुए हैं।

हम कम्प्यूटर से ही पर्ची देने की कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही आपको यहां बदलाव नजर आएगा।
एसके जैन, नियंत्रक नापतौल

अभी तो मैन्यूअली ही रसीद दे रहे हैं, विभाग की ओर से सरकार को प्रस्ताव भेजकर व्यवस्था कराएंगे।
डीके वर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

कई स्कूलों में कम्प्यूटर नहीं है। विभाग व्यवस्था कर रहा है। जहां ज्यादा देन-लेन नहीं है, वहां थोड़ा काम मैन्यूअली भी चलता है।
धर्मेंद्र शर्मा, डीईओ

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