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साइन बोर्ड पेंट करते करते बन गए देश-दुनिया के मशहूर शायर, जानिये राहत इंदौरी से जुड़े खास किस्से

मशहूर शायर राहत इंदौरी को गुजरे 11 अगस्त को एक साल बीत गया है। ऐसे में हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें बता रहे हैं, जिन्हें अब तक बहुत कम लोग ही जानते हैं।

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साइन बोर्ड पेंट करते करते बन गए देश-दुनिया के मशहूर शायर, जानिये राहत इंदौरी से जुड़े खास किस्से

भोपाल/ 'जब मर जाऊं, तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहु से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना', इसमें कोई शक नहीं कि, ये कलाम किसी देश भक्त का नहीं होगा। कहते हैं... शायरी, जिंदगी की ज़बान होती है। इस जिंदगी के कई रंग होते हैं और हर रंग जब एक साथ नज़र आए, तो उसे राहत इंदौरी कहना गलत नहीं होगा। जी हां, हम बात हिंदुस्तान के उसी शायर की कर रहे हैं, जिसने अपने कलाम से सालों तक हर उम्र के लोगों के दिलों पर राज किया है। एक ऐसा कलमकार जिसकी शायरी ने पूरी दुनिया पर हुकूमत की। आज यानी 11 अगस्त को उन्हें दुनिया से गुज़रे एक साल बीत चुका है। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें, जिन्हें अब तक बहुत कम लोग ही जानते हैं।


11 अगस्त 2020 को आंखों से ओझल हुआ शायरी की सितारा

पिछली साल आज ही के दिन शायरी, अदब और साहित्य का एक दमदमाता सितारा हमारी नजरों से ओझल हो गया। राहत इंदौरा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन, ये बात कोई नहीं नकार सकता कि, शायरी की महफिल हमेशा उन्हीं के कलाम से शुरु होगी। इसी तरह अब हर चाहने वाले के दिल में राहत साहब जिस तरह ज़िंदा थे उसी तरह ज़िंदा रहेंगे।

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राहत इंदौरी को चित्रकारी का उस्ताद भी कहा गया

1 जनवरी 1950 को कपड़ा मिल के कर्मचारी रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निसां बेगम के घर में पैदा होने वाले राहत इंदौरी को बचपन से पेंटिंग का काफी शौक था। घर के माली हालात ठीक न होने पर उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों के शौक को ही अपने जीवन यापन का जरिया बनाया और शहर में एक साइन-चित्रकार के रूप में 10 साल से भी कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया। शायरी के बेताज बादशाह कहे जाने वाले राहत इंदौरी अपने बचपन के दिनों में ही चित्रकारी के भी उस्ताद रह चुके थे। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही साइन-चित्रकारी के क्षेत्र में अपना नाम बना लिया था।


पेंटिंग से शायरी का सफर

राहत इंदौरी को जानने वाले पुराने लोगों का कहना है कि, ग्राहक राहत साहब के बनाए साइन बोर्ड को खरीदने के लिये महीनों पहले से ही बुकिंग करा देते थे। यानी उन पेंटिंग्स को पाने में लोगों को महीनों का इंतज़ार तक करना पड़ता था। पेंट ब्रश थामने वाले राहत ने जब कलम उठाई तब एक नया इतिहास लिख दिया। मुशायरे और कवि सम्मेलन की दुनिया में अपनी कई रातों को आबाद करने वाले राहत इंदौरी धीरे-धीरे शायर बन गए।

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बॉलीवुड से भी गहरा नाता

बॉलीवुड की दुनिया में भी राहत इंदौरी के गानों की रौशनी फैली। बॉलीवुड की 11 से अधिक फिल्मों में उनके लिखे गाने इस्तेमाल किये गए। रात क्या मांगे एक सितारा (फिल्म- खुद्दार), दिल को हज़ार बार रोका (फ़िल्म- मर्डर), एम बोले तो मास्टर मैं मास्टर (फ़िल्म- मुन्नाभाई एमबीबीएस), धुंआ धुंआ (फ़िल्म- मिशन कश्मीर), ये रिश्ता क्या कहलाता है (फ़िल्म- मीनाक्षी), चोरी-चोरी जब नज़रें मिलीं (फ़िल्म- करीब) जैसे कई गाने राहत इंदौर द्वारा ही लिखे गए हैं।

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