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ओडीएफ पंचायतों में कचरे से बनेगी खाद.. देखें पूरी खबर!

20 जिलों की 6415 बड़ी ग्राम पंचायतों में शहरों की तर्ज पर होगी सफाई

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भोपाल। प्रदेश के ओडीएफ 20 जिलों की 6415 बड़ी ग्राम पंचायतों में शहरों की तर्ज पर सफाई होगी। यहां घर-घर से कचरा उठाया जाएगा, जिससे जैविक खाद बनाई जाएगी। ठोस अपशिष्ट कबाड़ी को बेचे जाएंगे। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन, मध्यप्रदेश ने करीब 8000 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। कुछ जिला जल स्वच्छता समितियों ने डीपीआर को मंजूरी भी दे दी है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत मंदसौर, सीहोर और देवास जिले को पैसे भी दे दिए हैं। प्रस्ताव में बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से जैविक कचरा निकलता है।

बेचा जाएगा जैविक खाद

कचरे से बना जैविक खाद सरकारी नर्सरियों और किसानों को बेचा जाएगा। इससे जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। इधर, इस प्रोजेक्ट से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार मिलेगा। खाद और गैर जैविक कचरा बेचने का अधिकार पंचायतों को होगा। इससे पंचायतों को राजस्व मिलेगा। पहले चरण में मुख्य रूप से उन पंचायतों का चयन किया गया है जो किसी न किसी रूप में टैक्स कलेक्शन कर रही है। इसके बाद अन्य पंचायतों में यह व्यवस्था लागू की जाना है।

ऐसे विकसित होंगी पंचायतें

150 परिवार वाली पंचायतों को सात लाख ,300 परिवार वाली पंचायतों को 12 लाख, 500 परिवार वाली पंचायतों को 15 लाख और 500 से अधिक परिवार वाली पंचायतों को 20 लाख रुपए तक स्वच्छ भारत मिशन से सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट लागू करने के लिए दिए जाएंगे। वहीं, प्रति 1000 की आबादी पर मनरेगा के तहत पांच लाख रुपए अलग से दिए जाएंगे। इन पैसों से पंचायतों में सेल्फ सस्टेनेबल मॉडल पर आधारित अधोसंरचना का विकास किया जाएगा। इसके बाद यह प्रोजेक्ट को पंचायतों को ही संचालित करना होगा।

ग्रामीण क्षेत्र में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां से भी घर-घर से कचरा उठाकर एक जगह उसका प्रबंधन किया जाएगा। इससे पंचायतों को राजस्व मिलेगा। उन पंचायतों को प्राथमिकता दी गई हैं, जहां के निवासी पहले से टैक्स दे रहे हैं।
-सुधीर जैन, उपायुक्त, स्वच्छ भारत मिशन मप्र