18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Dilip Kumar: फिल्म ‘नया दौर’ ने दी दिलीप कुमार को नई ऊंचाइयां, आज भी वैसी है शूटिंग की लोकेशन

Dilip Kumar: बुदनी में शूट हुई नया दौर फिल्म और उसके गानों से मिली थी दिलीप कुमार को पहचान, आज भी नहीं बदली यह लोकेशन...।

3 min read
Google source verification

भोपाल

image

Manish Geete

Jul 07, 2021

dilip4.jpg

भोपाल। जाने-माने अभिनेता एवं ट्रेजडी किंग नाम से हमेशा चर्चित रहने वाले दिलीप कुमार (dilip kumar) का 98 वर्ष की आयु में बुधवार को सुबह निधन हो गया। वे काफी समय से बीमार थे। सुबह 7.30 बजे मुंबई के हिन्दुजा अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। इस मौके पर उनकी पत्नी फिल्म अभिनेत्री सायरा बानो भी साथ थी। उनकी कोई संतान नहीं थी। उल्लेखनीय है कि अपने करियर में सर्वाधिक लोकप्रिय फिल्म नया दौर की शूटिंग मध्यप्रदेश के बुदनी के जंगलों में हुई थी और जो गाने यहां फिल्माए गए थे, वे आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। 1956-57 में शूट हुई इस फिल्म के बाद ही दिलीप कुमार का सफर फिल्मी दुनिया की बुलंदी की तरफ बढ़ना शुरू हो गया था।

patrika.com पर पेश है ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार के बारे में यह बातें जो आप शायद नहीं जानते होंगे...।

मध्यप्रदेश के बुदनी के जंगल में फिल्माया गया वो गाना करीब 64 साल का हो गया है। यह गाना था जब-जब उड़े जुल्फें तेरी...। फिल्म के डायरेक्टर बीआर चौपड़ा जब बुदनी स्टेशन से गुजर रहे थे, तो यह लोकेशन उनको बहुत पसंद आई। उन्होंने तभी फैसला ले लिया था कि वे नया दौर की शूटिंग इसी लोकेशन पर करने आएंगे। हुआ भी ऐसा ही बीआर चौपड़ा अपनी टीम को लेकर चले आए। यहां दिलीप कुमार और वैजयंती माला का वो गाना जब वे तांगे में बैठकर जाते हैं और वो गाना मांग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार फिल्माया गया। इसके बाद उड़े जब-जब जुल्फे तेरी यह गाना तो आज भी नाच-गानों में जरूर इस्तेमाल होता है।


बुदनी क्षेत्र में करीब 8 माह तक इस फिल्म की शूटिंग हुई थी। यानी फिल्म के ज्यादातर सीन यही शूट किए गए थे। आज भी इस लोकेशन में ज्यादा अंतर नहीं आया है। लोग आज भी फिल्म के बैकग्राउंड में दिखने वाले पहाड़ों को देखकर समझ जाते हैं कि बुदनी की किस लोकेशन की शूटिंग है।

आज भी नहीं बदली बिल्डिंग

1957 की बात है औद्योगिक क्रांति और मजदूरों के बीच टकराव की स्थिति को लेकर डायरेक्टर बीआर चौपड़ा नया दौर बना रहे थे। इस फिल्म की कहानी मशीन और आदमी के संघर्ष पर आधारित थी। फिल्म में इस्तेमाल किया गया वो रपटा और रास्ता आज भी मौजूद है, यहां पर दिलीप कुमार ने अपना तांगा दौड़ाया था। बुदनी स्टेशन, भोपाल रोड, रेस्ट हाउस समेत आधा दर्जन से अधिक लोकेशन पर सीन शूट किए गए। करीब 8 माह तक पूरी टीम यही रही। होशंगाबाद, सीहोर और आसपास के कई गांवों के लोग यहां बड़ी संख्या में शूटिंग देखने जाते थे। दिलीप कुमार, जॉनी बाकर और अभिनेत्री बैजयंती माला यही गेस्ट हाउस में रहते थे।

नरसिंहगढ़ में भी हुई शूटिंग

मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ में भी किले पर दूसरी फिल्म की शूटिंग हुई थी। उमठ परमार राजवंश का करीब 320 साल पुराना किला आज भी सीना ताने खड़ा है। नरसिंहगढ़ के किले, जलमंदिर, कोटरा के साथ देवगढ़, कंतोड़ा, रामगढ़ के जंगल, गऊ घाटी के हिस्से फिल्माए गए थे।

यह अवार्ड भी मिले

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया शोक व्यक्त

दिलीप कुमार के निधन के बाद मध्यप्रदेश में भी शोक की लहर दौड़ गई। मध्यप्रदेश के दिग्गज नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट के जरिए कहा है कि मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि दिलीप कुमार के रूप में हम सबने आज एक महान अभिनेता खो दिया। वे भारतीय सिनेमा में अपने असाधारण योगदान के लिए सदैव याद किए जाएंगे। मनोरंजन जगत के लिए यह अपूर्णीय क्षति है। विनम्र श्रद्धांजलि।