
First Deputy Chief Minister: मध्यप्रदेश में मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री घोषित करने के बाद अब शपथ ग्रहण के लिए भी दिन तय कर दिया गया है। 13 दिसंबर बुधवार के दिन सुबह 11.30 बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह समारोह राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान पर होगा। जहां मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव शपथ लेंगे, इनके साथ ही डिप्टी सीएम के रूप में जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल सहित अन्य कैबिनेट के मंत्री भी शपथ ग्रहण करेंगे। आपको बता दें कि एमपी में 2003 के बाद यानी 20 साल बाद डिप्टी सीएम नियुक्त किए गए हैं लेकिन, क्या आप जानते हैं डिप्टी सीएम की परम्परा कहां से और कैसे शुरू हुई या फिर आखिर क्यों पड़ गई थी डिप्टी सीएम की जरूरत? इस सवाल के साथ ही जानें कितना होता है डिप्टी सीएम का वेतन और भत्ते...
साल 1946 में इस राज्य से शुरू हुई डिप्टी सीएम की परम्परा
आपको बता दें कि भारत में बिहार ऐसा पहला राज्य है जहां पहली बार डिप्टी सीएम की परम्परा शुरू की गई। कांग्रेस के अनुग्रह नारायण सिन्हा किसी भी राज्य के डिप्टी सीएम का पद संभालने वाले पहले नेता थे। 1946 में उन्होंने बिहार के डिप्टी सीएम का पद संभाला था। वे 11 साल तक या कहें कि 1957 में इसी पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ। तब से आज तक देश के कई राज्यों में डिप्टी सीएम का पद अस्तित्व में बना हुआ है।
कैसे नियुक्त किया जाता है डिप्टी सीएम
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत सीएम को संवैधानिक दर्जा हासिल है। किसी भी राज्य में जब सरकार बनती है तो राज्यपाल उस राज्य के मुख्यमंत्री को नियुक्त करता है। मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल राज्य के डिप्टी सीएम की नियुक्ति करता है। जिस तरह 11 दिसंबर को मध्य प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया है तो, वहीं मोहन यादव की सिफारिश पर ही जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला को डिप्टी सीएम नियुक्त किया गया है।
यहां जानें वेतन और भत्ते
किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री का पद खास होता है। उसके बाद डिप्टी सीएम पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आपको बता दें कि डिप्टी सीएम को एक कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है। ऐसे में उन्हें वेतन और भत्ते भी कैबिनेट मंत्री के रूप में ही दिए जाते हैं।
पूरी करनी होती है ये जिम्मेदारी
अब सवाल ये है कि आखिर डिप्टी सीएम को क्या करना होता है? तो आपको बता दें कि अक्सर डिप्टी सीएम होने के नाते सीएम इन्हें बड़े विभागों की जिम्मेदारी सौंपते हैं। वहीं डिप्टी सीएम अन्य विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल सकता है।
ये हैं मध्यप्रदेश के पहले डिप्टी सीएम
आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में 1967 में वीरेंद्र कुमार सकलेचा पहले डिप्टी सीएम थे। वीरेंद्र कुमार सकलेचा को गोविंद नारायण सिंह की संविदा सरकार में यह पद दिया गया था। सकलेचा जनसंघ के नेता थे। शिवभानुसिंह सोलंकी थे दूसरे डिप्टी सीएम कांग्रेस ने पहली बार शिवभानुसिंह सोलंकी को डिप्टी सीएम बनाया था। आदिवासी वर्ग से आने वाले सोलंकी दिग्विजय सिंह की सरकार में डिप्टी सीएम बने थे। वहीं शिवभानु सिंह सोलंकी 1993 में मुख्यमंत्री पद की रेस में भी शामिल थे। लेकिन पार्टी ने उन्हें डिप्टी सीएम के पद पर नियुक्त किया।
एमपी की जमुना देवी थीं देश की पहली महिला डिप्टी सीएम
एमपी के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो पहली महिला डिप्टी सीएम मध्यप्रदेश में ही नियुक्त की गई थीं। 1998 में दिग्विजय सिंह की सरकार में जमुना देवी डिप्टी सीएम बनीं। उनका नाम चर्चा में इसलिए भी आ रहा है क्योंकि वे मध्य प्रदेश की ही नहीं बल्कि, देशभर में पहली ऐसी महिला नेता थीं जो डिप्टी सीएम पद पर नियुक्त की गई थीं। जमुना देवी को बुआजी के नाम से पुकारा जाता था।
MP में कब-कब कौन रहा डिप्टी सीएम?
1. वीरेंद्र सकलेचा - 1967 से 1969 तक मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम थे।
2. शिव भानु सोलंकी- 1980 में अर्जुन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टी सीएम थे।
3. सुभाष यादव- 1993 से 1998 दिग्विजय सिंह की सरकार में डिप्टी सीएम थे।
4. जमुना देवी- 1998 से 2003 दिग्विजय सिंह की सरकार में डिप्टी सीएम थीं।
Updated on:
12 Dec 2023 01:38 pm
Published on:
12 Dec 2023 01:36 pm
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