
भोपाल। भोपाल हाट में चल रहे स्टेट हैंडलूम एक्सपो में देश की पहली महिला ट्रांसजेंडर कथक नृत्यांगना देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने अपने नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। देविका ने पहली प्रस्तुति देवी स्त्रोतम की दी, जो शुद्ध कथक पर आधारित थी। इसके बाद पारंपरिक झपताल की प्रस्तुति दी। अगली कड़ी में छन्नूलाल मिश्र रचित होली गीत 'डालूंगी डालूंगी रंग डालूंगी...' पर नृत्य पेशकर अपने भावों से सर्द शाम को होली के रंगों से सराबोर कर दिया। त्रिबद्ध तराना पर कथक नृत्य पेशकर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया।
दादी और मां को नहीं मिला मौका
लखनऊ घराने की नृत्यांगना देविका देवेंद्र बातती हैं कि उनकी दादी चाहती थीं कि वे नृत्यांगना बनें, लेकिन ब्राह्मण परिवार से होने की वजह से उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली। इसके बाद उनकी मां भी नृत्यांगना बनना चाहती थीं लेकिन, वे भी अपना सपना पूरा नहीं कर पाईं। मां ने उन्हें बचपन से ही कथक नृत्य सीखने के लिए प्रेरित किया। देविका ने कपिला महाराज से नृत्य की शिक्षा ली।
किन्नर समाज के बीच से भाग गई थीं देविका
देविका ने जीवन संघर्ष की कहानी सुनाते हुए कहा कि उन्हें किन्नर समाज के लोग साथ ले गए लेकिन उन्हें लगा कि यहां उनका कुछ नहीं हो सकता। इसलिए मौका मिलते ही वे वहां से भाग निकलीं और नाच-गाकर भीख मांगने लगी। उन्हें लगा कि उनका जीवन अब खत्म हो गया है।
देविका के लिए जीवन जीने का माध्यम है कत्थक
देविका बताती हैं कि उनके जीवन जीने का माध्यम ही कथक है। वे कथक से जुड़कर अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करती हैं। कथक के लखनऊ घराने में अजब सौंदर्य बोध है। वे कहती हैं कि हाथों की बनावट, नजाकत, नफासत के साथ लखनऊ का अभिनय प्रधान कथक जीने की वजह देता है। घुंघुरुओं की झंकार में जीवन का मधुर संगीत सुनाई देता है।
आसान नहीं थी ये रहा
देविका कहती हैं कि उनके लिए नृत्य से जुडऩा आसान नहीं था। लोगों ने ताने मारे, चोट भी पहुंचाई, लेकिन उनका मन कथक में रम चुका था। कथक से जुड़कर उन्होंने जीवन का सही अर्थ समझा और यह अर्थ है, कांटों की राह पर चलकर मंजिल तक पहुंचना। उन्होंने बताया कि आचार्य कपिला राज ने उन्हें देखा और कहा कि यह मेरा कार्ड लो, मेरे पास लखनऊ आना। दो साल बाद देविका उनके पास पहुंची और ढाई साल तक उनसे कत्थक की विधा में महारत हासिल की।
इंग्लिश में पीएचडी हैं देविका
देविका ने सिर्फ नृत्य ही नहीं सीखा बल्कि अपनी पढ़ाई भी पूरी की। उन्होंने स्थानीय एनजीओ से जुड़कर पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ जॉब भी किया। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी आईं। यहां ग्रेजुएशन किया। फिर इंग्लिश लिटरेचर में पीएचडी भी प्राप्त की।
Published on:
14 Dec 2022 01:09 pm
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