
भोपाल. पूरा मध्यप्रदेश आज भले ही कड़ाके की ठंड से गुजर रहा हो पर इससे पहले यहां कुछ खास सर्दी नहीं पड़ी. यहां तक कि दिसंबर में भी लोग सर्दी के लिए तरस गए। ठंड के इस सीजन में दिसंबर पिछले 17 साल में सबसे ज्यादा गर्म रहा। मौसम के इस तेवर का फसल पर भी व्यापक असर पड़ा है. हाल ये है कि कई फसलें समय से पहले पक गई हैं.
हॉर्टिकल्चर एक्सपर्ट बताते हैं कि इस बार सरसों समय से पहले ही पक चुकी है. दिसंबर के महीने में पर्याप्त ठंड नहीं रहने के कारण ऐसा हुआ है. दिसंबर में ज्यादातर दिनों तक तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री ज्यादा बना रहा था। इस मौसम का असर फसलों और फूलों पर सबसे ज्यादा पड़ा।
इस बार प्रदेश के कई हिस्सों में लगी सरसों में फूल आ गए हैं. सरसों की फसल के साथ ही आम पर भी मौसम का असर देखा जा रहा है. कई जगहों पर आम के पेड़ में बौर आ गए हैं। कई जगहों पर तो टेसू के फूल भी खिलने लगे हैं। फल अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक बताते हैं कि दिसंबर में तापमान ज्यादा रहने के कारण कई फूल पौधों पर व्यापक असर हुआ।
सरसों के पौधों में फूल बनने और निकलने की शुरुआत 15 दिसंबर से ही हो चुकी थी।
दिसंबर में लगातार तापमान ज्यादा बने रहने के कारण आम और खाकरे के पेड़ों पर भी असर हुआ। कई इलाकों में आम के पेड़ों पर बोर आ चुकी हैं. किसान भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि महीने भर ठंड नहीं पड़ने के कारण फसलों और फूलों पर खासा असर पड़ा है। सरसों की फसल में फूल आ गए और कई जगहों पर आम में बौर भी आ गए हैं। टेसू के फूल भी इसी कारण खिलने लगे हैं।
Published on:
07 Jan 2023 03:17 pm
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