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मैहर के शारदा माता मंदिर पर पूर्ण सरकारी नियंत्रण, जारी किया ये आदेश

मध्यप्रदेश के विश्वप्रसिद्ध मैहर के माता शारदा देवी मंदिर पर सरकार का पूरा नियंत्रण

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माता शारदा देवी मंदिर पर सरकार का पूरा नियंत्रण

भोपाल. मध्यप्रदेश के विश्वप्रसिद्ध मैहर के माता शारदा देवी मंदिर पर सरकार का पूरा नियंत्रण है। आरटीआई अधिनियम (RTI Act) के तहत आमजन मंदिर के बारे में समस्त जानकारी ले सकते हैं। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने इस संबंध में बड़ा फैसला लेते हुए एक आदेश भी जारी किया है. सूचना आयुक्त ने सतना कलेक्टर अनुराग वर्मा को आदेशित किया है कि वे प्रशासक के स्तर पर मंदिर की जानकारी RTI अधिनियम के तहत सुचारू रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें।

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने एडवोकेट आनंद श्रीवास्तव द्वारा आरटीआई अधिनियम (RTI Act) के तहत मैहर के मां शारदा देवी मंदिर की जानकारी मांगे जाने पर यह आदेश जारी किया। इस आवेदन में मंदिर की प्रबंध समिति में नियुक्ति की जानकारी मांगी गई थी। इसके साथ ही कुछ अन्य जानकारियां भी मांगी लेकिन उनके RTI आवोदन को मंदिर प्रशासक और मैहर के एसडीएम धर्मेंद्र मिश्रा ने निरस्त कर दिया. उन्होंने यह तर्क दिया कि शारदा माता मंदिर प्रबंध समिति या मंदिर आरटीआई अधिनियम के दायरे में नहीं आती है.

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए एसडीएम धर्मेंद्र मिश्रा से पूछा कि आपने आरटीआई आवेदन क्यों निरस्त किया। मिश्रा ने अपने लिखित जवाब में तर्क देते हुए कहा कि मंदिर में मां शारदा देवी की मूर्ति का कलेक्टर को संरक्षक नियुक्त किया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मां शारदा देवी कलेक्टर के अधीन हैं। मां शारदा देवी मंदिर को राज्य शासन से कोई अनुदान नहीं मिलता है। मिश्रा ने ये भी कहा कि मां शारदा देवी मंदिर पर राज्य शासन का कोई नियंत्रण या कानून प्रभावी नहीं है। इसलिए मंदिर पर आरटीआई अधिनियम लागू नहीं है।

इस पर राज्य सूचना आयुक्त ने साफ कहा कि मंदिर की प्रबंध समिति मां शारदा देवी मंदिर मैहर अधिनियम 2002 के तहत गठित की गई है. उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए यह भी कहा कि कोर्ट ने भी मंदिर को पूर्ण रूप से राज्य सरकार के नियंत्रण में माना है. राज्य शासन के नियंत्रण में होने से स्पष्ट है कि मैहर मंदिर पर आरटीआई एक्ट लागू है. सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि मंदिर को सन 2016-17 में करीब 49 लाख रुपए की राशि राज्य शासन से प्राप्त हुई थी. सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुसार जिस संस्थान में शासन द्वारा 50000 रुपए तक की राशि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगी हो वहां आरटीआई अधिनियम लागू होता है.