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Gandhi medical College Student Suicide Case: मेडिकल Student सुसाइड के बाद टीचर की भावुक पोस्ट वायरल, अनुरोध-दो मिनट निकाल जरूर पढ़िए

Gandhi medical College Student Suicide Case: मैं अपने सैंतीस वर्षों के चिकित्सकीय, शिक्षकीय जीवन तथा उम्र के पांच दशकों का अनुभव साझा करना चाह रहा हूं। अनुरोध है कि कुछ मिनट का समय देकर इसे जरूर पढि़ए... पढ़ें पूरी पोस्ट

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Gandhi medical College Student Suicide Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले दिनों एक महिला जूनियर डॉक्टर बाला सरस्वती के सुसाइड का मामला सामने आया था। ऐसे में मेडिकल एजुकेशन और वहां के माहौल को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। स्टूडेंट्स भी अपने ऊपर दबावों को लेकर एक दिन का राज्यव्यापी आंदोलन भी कर चुके हैं। इसी बीच जबलपुर के मेडिकल एजुकेशन के सीनियर टीचर डॉ. जितेंद्र भार्गव की एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रही है। जो न केवल समस्या की ओर लोगों को अट्रैक्ट कर रही है, बल्कि स्ट्रेस से बचने का सॉल्यूशन भी दे रही है। आपको बताते चलें कि गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की थर्ड ईयर स्टूडेंट बाला सरस्वती ने एनेस्थीसिया इंजेक्शन का ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली थी।

इस हादसे के बाद बाला सरस्वती के पति जयवर्धन चौधरी ने आरोप लगाए कि पत्नी से 36 घंटे की ड्यूटी कराई जाती थी, उसके थीसिस स्वीकार नहीं किए जाते थे। उसको 6 महीने का एक्सटेंशन दिया गया था। पहले बाला ने मेडिकल लीव ली थी, जिसे अप्रूव नहीं किया गया। पत्नी को जूनियर्स के सामने ही नजर अंदाज किया जाता था। उन्होंने कहा कि सरस्वती मुझे हर बात बताती थी। उसे वहां कामचोर तक कहा जाता था। इसीलिए उसने आत्महत्या कर ली।

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इस बीच जबलपुर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन के डायरेक्टर और मेडिकल टीचर डॉ. जितेंद्र भार्गव का सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है। डॉ. जितेंद्र भार्गव का कहना है कि कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं, जिसका समाधान न किया जा सके। बस जरूरत उससे सही ढंग से निपटने का तरीका बताने की है। वे अपने विभाग में तो मानसिक दबाव से निकलने के लिए एक्सपर्ट से काउंसलिंग भी करवाते हैं। वे कहते हैं कि सोशल मीडिया पोस्ट को उन्होंने स्टूडेंट्स के इंटरनल ग्रुप में भी शेयर किया है।

डॉ. भार्गव ने किया अनुरोध

माई डियर पोस्ट ग्रैजूएट मेडिकल स्टूडेंट्स, विगत दिनों में एक पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्रा की असामयिक मृत्यु की घटना से सबका हृदय द्रवित किया है। जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और ईश्वर करे कि दोबारा इसकी पुनरावृत्ति कभी, कहीं न हो। इस कठिन समय में भी आशा और अनुरोध है कि कृपया आप सब अपना खयाल बेहतर ढंग से रखें। मैं अपने सैंतीस वर्षों के चिकित्सकीय, शिक्षकीय जीवन तथा उम्र के पांच दशकों का अनुभव साझा करना चाह रहा हूं। अनुरोध है कि कुछ मिनट का समय देकर इसे जरूर पढि़ए... पढ़ें पूरी पोस्ट

'जीवन सर्वाधिक महत्वपूर्ण है.बेहद मधुर बेहद सुंदर है। आपकी एजूकेशनल डिग्री इस विशाल जीवन का एक हिस्सा मात्र है सम्पूर्ण जीवन नहीं। इसका आनंद उठाने को आप सर्वोपरि मानिए। जीवन का आनंद उठाने के लिए परिवार एक बहुत महत्वपूर्ण इकाई है। यह आप अब तक के अपने जीवन अनुभव से भली भांति जानते हैं। आप आज जहां भी हैं उसके पीछे आपकी मेहनत एवं आपके परिवारजन का योगदान है।

यदि आज आप MD / MS या super स्पेशल्टी कोर्स कर रहें हैं तो वह इसलिए कि आपने अपनी मेहनत से MBBS डिग्री प्राप्त की, NEET में सफलता प्राप्त की और खुद के प्रयासों से MD / MS या सुपर स्पेशल्टी कोर्स में प्रवेश प्राप्त किया.जीवन को उसकी विराटता में देखें आज आप जिन लोगों के साथ (HOD/Teachers/ seniors/ juniors/ colleagues या अन्य कोई भी authoritative position वाला व्यक्ति) के साथ काम कर रहें हैं, वह एक संयोग मात्र है। आपकी डिग्री की यात्रा का पड़ाव मात्र है। आपके कार्यस्थल में आपके साथ काम कर रहे लोगों की भूमिका आपके जीवन में बेहद सीमित है। इनकी भूमिका का कितना विस्तार हो या यह कितनी महत्वपूर्ण हो, यह आपके हाथ में होना चाहिए। इनमें से किसी का भी आपकी पिछली सफलताओं (MBBS हासिल करना , MD/ MS में प्रवेश) में योगदान नहीं है।

आपकी आज तक की सारी सफलताएँ आपने अपने स्वयं के प्रयासों (कठोर मेहनत) और माता पिता के सहयोग और आशीर्वाद से प्राप्त की हैं।आगे भी यही क्रम जारी रहने वाला है। आपकी MD/ MS उपाधि और भविष्य की अन्य सारी उपलब्धियाँ भी आप इन्हीं शक्तियों के माध्यम से प्राप्त करेंगे।

कहने का सार यह है कि आपके जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति आप स्वयं हैं। इसके पश्चात आपके माता-पिता पति-पत्नी बच्चे, करीबी मित्र आदि हैं। आपकी मेहनत और लगन किसी भी व्यक्ति द्वारा डाले जा सकने वाले किसी भी सम्भावित नकारात्मक प्रभाव से बड़ी है। यदि आप ऐसा महसूस कर रहे हैं कि आपके ऊपर कोई अनावश्यक दबाव बन रहा है तो उसके बारे में बात करिए। गलत बात या कार्य का उचित तरीके से खुल कर विरोध करिए परंतु स्वयं भी नियम मत तोड़िए। किसी भी सिस्टम के सुचारु संचालन के लिए कुछ नियम या व्यवस्थाएँ होती हैं, इनका पालन करिए। यह आपको बहुत सी अनावश्यक परेशानियों से बचाता रहेगा।

मुश्किल या दुविधा भरे समय में अपने सपोर्ट सिस्टम का सहारा लीजिए। अपने सपोर्ट सिस्टम को अच्छे से जानिए। इसमें मुख्यतः माता पिता, भाई-बहन करीबी दोस्त एवं अन्य परिवार जन होते हैं। इनके सतत सम्पर्क में रहिए.आप एक ऐसे पेशे में हैं जहां मरीजों की जीवन रक्षा का भार आपके ऊपर है। अत: एक संवेदनशील एवं जिम्मेदार मनुष्य होने के नाते आपको अपना कर्तव्यनिर्वहन भी करना है।

हो सके तो समय निकाल कर इन किताबों को अवश्य पढ़िए :
1) Games People Play - Author Erich Berne MD.

2) I am Ok: You are Ok - Author Thomas Harris MD.

इन किताबों से आपको जीवन के मनोवैज्ञानिक पक्षों ( ख़ासकर दो व्यक्तियों के मध्य होने वाले संवाद और उसके पीछे के उनके सोचने के तरीक़ों के बारे में ) को साइंटिफिक ढंग से समझने में मदद मिलेगी और आप रोज़मर्रा के जीवन में आने वाले परिवर्तनों, दबावों और उतार चढ़ावों का अधिक आसानी से सामना कर पाएंगे। एक बार फिर से दोहराना ठीक होगा कि आपका जीवन आपका है, आपके परिवार जन का है.इसका नियंता किसी और को मत बनने दीजिए.इसका निर्बाध आनंद उठाइए.मुझे बेहद ख़ुशी होगी यदि आप किसी सहायता के लिए मुझे याद करते हैं।

मुझसे आप jitendrbhargava@gmail.com या डायरेक्ट मैसेज कर सम्पर्क कर सकते हैं। आपके स्वस्थ सुखद सुदीर्घ जीवन की अनंत शुभकामनाओं और बहुत-बहुत स्नेह के साथ- प्रोफेसर डॉ. जीतेंद्र भार्गव।

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