
भोपाल। 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व को गणशोत्सव या विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। गणेशोत्सव के दिन लोग घरों में भगवान गणेश को स्थापित करते हैं और 10वें दिन यानी अनंत चतुदर्शी के दिन विर्सजन किया जाता है। इस बार ये पर्व 25 अगस्त से 5 सितंबर तक चलेगा।
पूजन का विशेष महत्व :
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेशजी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह पर्व शुक्रवार यानी (25 अगस्त) को मनाया जाएगा। गणेश चतुर्थी के दिन पूजन का विशेष महत्व होता है। इस पूजन में छोटी- छोटी बातों का विशेष महत्व होता है। इस बार गणेश चतुर्थी पर 58 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। इस कारण इस बार गणेश चतुर्थी और भी अधिक खास हो गई है। हिंदू धर्म में प्रत्येक मंगल कार्य को शुरू करने से पहले भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है। यदि गणेश पूजा को पूरी विधि-विधान से किया जाए तो यह बहुत फलदायी होती है। वहीं मान्यता है कि यदि पूजन के दौरान आपसे कोई गलती हो जाए तो यह शुभ नहीं होता।
यह है खास बात :
- भाद्र पद में आने वाला ये पर्व इस बार काफी शुभ है, क्योंकि इस बार ये पर्व हस्त नक्षत्र में पड़ रहा है, जिसे काफी शुभ माना जाता है।
- बप्पा को घर लाने, स्थापना करने और उनकी पूजा करने के लिए भक्तों के पास मध्यान्ह के 2 घंटे 33 मिनट होंगे। गणपति का जन्म मध्यान्ह काल में हुआ था, इसीलिए इसी काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11.05 से लेकर दोपहर 01.39 बजे तक रहेगा।
- एक चौकी पर लाल रेशमी का वस्त्र बिछाकर उसमें मिट्टी, धातु, सोने या चांदी मूर्ति के रखें और 'ऊं गं गणपतये नमः' कहते हुए पूजन सामग्री गणपति को अर्पित करें। इसके बाद एक पान के पत्ते पर सिंदूर में हल्का सा घी मिलाकर स्वास्तिक चिन्ह बनाएं। जिसके ऊपर कलावा से लिपटी एक सुपारी को रख दें।
- इन्हीं को गणपति मानकर या फिर मिट्टी की प्रतिमा के साथ रखकर पूजा करें। गजानंद को लड्डू बेहद है, इसीलिए मोतीचूर के लड्डू जरूर चढ़ाएं। लड्डू के साथ गेहूं का परवल, धान का लावा, सत्तू, गन्ने के टुकड़े, तिल, नारियल और केले चढ़ाएं।
शनि की चाल हुई सीधी:
भगवान गणेश की आराधना के लिए बुधवार का दिन भी विशेष फलदायी होता है। हिंदू संस्कृति में भगवान गणेश का सर्वोपरि स्थान है। प्रत्येक मंगल कार्य को शुरू करने से पहले भगवान गणेश का आह्वान जरूरी है। इस बार की गणेश चतुर्थी खास है क्योंकि जिस दिन गणेश चतुर्थी है उसी दिन शनि अपनी सीधी चाल चलेंगे।
ये है पूजा का शुभ मुहूर्त :
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी 25 अगस्त 2017 को है। चतुर्थी 24 अगस्त 2017 को रात 20:27 बजे शुरू होगी और 25 अगस्त 2017 को रात 20:31 बजे समाप्त होगी। वहीं घर में या प्रतिष्ठान में गणेश जी की मूर्ति लाने का समय: सुबह 07:38 से 08:32 तक रहेगा। वहीं गणेश पूजन का शुभ समय प्रातः 09:15 से 10:28 बजे तक और दोपहर 12:16 से 01:17 तक है।
तब हुआ था मनोरथ पूरा
मान्यता है कि देवता भी अपने कार्यों को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए पहले गणेश जी का ध्यान करते हैं। शास्त्रों में भी भगवान गणेश की महत्ता का वर्णन किया गया है। बताया गया है कि एक बार भगवान शंकर त्रिपुरासुर का वध करने में असफल हो गए। असफलता पर महादेव ने विचार किया तो शिवजी को ज्ञात हुआ कि वे गणेशजी की अर्चना किए बगैर त्रिपुरासुर से युद्ध करने चले गए थे। इसके बाद शिवजी ने गणेश पूजन करके दोबारा त्रिपुरासुर पर प्रहार किया, तब उनका मनोरथ पूर्ण हुआ।
ऐसे करें गणेश पूजन :
हिंदू शास्त्रों में गणेश जी को सभी दुखों और परेशानियों को हरने वाला देवता बताया गया है। गणेश उपासना से शनि समेत सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं। गणेश चतुर्थी वाले दिन गणेश पूजन के लिए सुबह के समय स्नानादि से निवृत्त होकर सबसे पहले गणेश प्रतिमा को पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके लाल रंग के आसन पर विराजमान करें।
यह चढ़ाएं, यह न चढ़ाएं :
इसके बाद आप शुद्ध आसन पर भगवान के सामने अपना मुख करके बैठे और भगवान का ध्यान करते हुए पूजन सामग्री जैसे पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली, लाल चंदन और मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित करें। हिंदू धर्म में भगवान गणेश के पूजन में तुलसी दल और तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। उन्हें किसी शुद्ध स्थान से चुनी हुई दुर्वा (दूब घास) को धोकर ही चढ़ाना चाहिए।
प्रिय भोग है मोदक :
भगवान गणेश को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। पूजा करते समय क्रोध नहीं करना चाहिए। यह आपके और परिवार दोनों के लिए ही हानिकारक हो सकता है। सभी चीजों को अर्पित करने के बाद भगवान गणेश का स्मरण कर 'ऊं गं गणपतये नम:’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए।
ऊपरी हवा से छुटकारा :
मान्यता है कि बुधवार के दिन घर में सफेद रंग के गणपति की स्थापना करने से समस्त प्रकार की तंत्र शक्ति का नाश होता है। घर में किसी पर ऊपरी हवा का असर भी नहीं होता। धन की समस्या दूर करने या रोजगार में सफलता के लिए बुधवार को श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद भोग लगाए हुए घी और गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी परेशानी दूर होती है।
परिवार में कलह है तो ये करें उपाय:
परिवार में कलह हो तो बुधवार के दिन दूर्वा के गणेश जी की प्रतीकात्मक मूर्ति बनवाएं। इसे घर में पूजा के स्थान में स्थापित करें और प्रतिदिन इसकी विधि-विधान से पूजा करें। पंडित शर्मा के अनुसार इससे क्लेश कम हो जाएगा। घर के मुख्य दरवाजे पर गणेशजी की प्रतिमा लगाएं। बिल्कुल ऐसी ही प्रतिमा घर के अंदर भी लगाएं। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गणपति से लें फाइनेंशियल टिप्स:
गणेश चतुर्थी के साथ ही त्योहारों और उत्सवों का मौसम शुरू हो गया है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश अपने भक्तों का जीवन धन-संपत्ति, समृद्धि और ऐश्वर्य से भर देते हैं। गणपति से जुड़ी इस आस्था और त्योहार से हमें अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और एक बेहतर जिंदगी जीने की शिक्षा मिलती है। फाइनेंस के जानकार और पंडित श्रीराम शर्मा के अनुसार भगवान गणेश से हमें कई तरह की प्रेरणाएं मिल सकती हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं...
कुछ बड़ा सोचें :
भगवान गणेश के विशालकाय सिर से आपको कुछ बड़ा सोचने की प्रेरणा मिलती है। आपको एक ऐसी धन योजना बनानी चाहिए, जिसमें आपके अल्पकालिक, मध्यकालिक, और दीर्घकालिक लक्ष्य शामिल हों और उपयुक्त साधनों में निवेश करने की व्यवस्था हो। इसके लिए आपको एक ऐसा बजट तैयार करने की जरूरत है, जिसमें अपनी हैसियत के अनुसार खर्च करने और जोखिम उठाने की क्षमता के साथ आवश्यकता के आधार पर अलग-अलग विकल्पों में निवेश करने के लिए कुछ पैसे रखने की व्यवस्था हो, जो बहुत लोकप्रिय न भी हो तो चलेगा, लेकिन उनसे अच्छा रिटर्न मिलना चाहिए।
इस बड़ी सी योजना में रिटायरमेंट प्लान, इंश्योरेंस खरीदने और पैसे जमा करने के उपाय भी शामिल होने चाहिए।
पैसों के मामले में अनुशासन बनाए रखें :
भगवान गणेश की आंखें, एकाग्रता और ध्यान-मग्नता की प्रतीक हैं। अपने लिए एक योजना बनाने के बाद आपको अपने लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करते रहना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए। आपको ध्यान भटकने या निराश होने से बचने के लिए खर्च और बचत पर अनुशासन बनाए रखने की जरूरत पड़ती है। इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि आपके आर्थिक उद्देश्य के अनुसार आपका आर्थिक विकास हो रहा है या नहीं। इसके अलावा अपने निवेश में जरूरत के अनुसार बदलाव करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि बैंक अपनी ब्याज दरों में कटौती कर दे तो आपको अपने उधार और ईएमआई में कटौती करने की व्यवस्था करनी चाहिए।
बजट पर ध्यान दें :
गणेश पूजा का आयोजन करने से आपको अपनी अर्थव्यवस्था को सुव्यवस्थित करने की शिक्षा मिलती है। इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए खर्च को ध्यान में रखते हुए एक बजट तैयार करना पड़ता है और अलग-अलग खर्च के लिए आवश्यक अनुपात में पैसे का बंटवारा करना पड़ता है। आप इस शिक्षा का उपयोग करके अपने दैनिक जीवन में अपनी अर्थव्यवस्था को सुव्यवस्थित कर सकते हैं और अपनी आमदनी व खर्च पर नजर रख सकते हैं। हर महीने अपने आर्थिक बजट के अनुसार ही खर्च और बचत-निवेश करें। अपने बजट के अनुसार खर्च करने से आपको पैसे जमा करने, टैक्स बचाने और अपने परिवार को सुरक्षित करने में काफी मदद मिल सकती है।
चौकन्ना रहें:
भगवान गणेश के लम्बे-लम्बे कानों से आपको चौकन्ना रहने की शिक्षा मिलती है और इसके लिए आपको विज्ञापनों और अपने दोस्तों की सलाह के आधार पर निर्णय लेने के बजाय अच्छी वित्तीय सलाह पर ध्यान देना चाहिए। सही सलाह की पहचान करने और उपयोगी वित्तीय निर्णय लेने के लिए सतर्क रहना जरूरी होता है।
टीम वर्क :
गणेश पूजा का आयोजन करने के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य के योगदान और सहयोग की जरूरत पड़ती है। आर्थिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी इसी तरह की योजना और सहयोग की जरूरत पड़ती है। जब तक प्रत्येक व्यक्ति सामूहिक रूप से बजट के अनुसार कार्य करने और खर्च को नियंत्रण में रखने का प्रयास नहीं करता है तब तक आर्थिक लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन है। इस गणेश पूजा, सुनिश्चित करें कि आपके परिवार के सभी सदस्य अपनी-अपनी जिम्मेदारी उठाएं और आपके आर्थिक लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग करें।
कुल मिलाकर, भगवान गणेश अपनी बुद्धि और धैर्य के लिए मशहूर हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए आपको इन दोनों की जरूरत है। इसलिए, गणेश चतुर्थी के दिन उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ें।
Published on:
25 Aug 2017 11:57 am
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