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रोमांच के शौकीनों की पहली पसंद, हर पल रहता है यहां मौत का खौफ…!

gaumukh tapovan trek- गौमुख -तपोवन ग्लेशियर पर 60 किमी ट्रैकिंग कर लौटा दल...। पत्रिका को बताए रोमांचक अनुभव...।

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भोपाल

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Manish Geete

Jun 19, 2022

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गौमुख से तपोवन के पहाड़ों पर लहराया तिरंगा...।

भोपाल। गौमुख ग्लेशियर भारत का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है। इस स्थान पर जाने की चाह हर पर्वतारोही की होती है। एडवेंचर के शौकीन युवा ही इस पूरे ट्रैक को सफलतापूर्वक कर पाते हैं। क्योंकि इस स्थान पर जीरो डिग्री के नीचे तापमान रहता है और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मौत का साया साथ चलता है। राजधानी से गए 9 साहसी ट्रेकर्स ने गौमुख-तपोवन (Gaumukh Tapovan Trek) का ट्रैक चार दिन में फतह कर लिया। दल के सदस्यों ने पहाड़ों की चोटी पर तिरंगा भी लहराया।

उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ और पवित्र गंगा के उद्गम गौमुख का रास्ता आसान नहीं है। हमेशा ग्लेशियर से ढंके रहने वाला यह डेस्टिनेशन पर्वतारोहियों की पहली पसंद है। राजधानी के 9 साहसी ट्रेकर्स ने भी 6 जून से 13 जून के बीच यह ट्रैक पूरा किया। इस ग्रुप के सदस्य स्वाभिमान शुक्ला ने पत्रिका के साथ अपने अनुभव साझा किए।

गोमुख तपोवन का 60 किमी लंबा

स्वाभिमान शुक्ला बताते हैं कि गोमुख-तपोपन का पूरा ट्रैक 60 किलोमीटर लंबा है। गंगोत्री से इसकी शुरुआत की गई। यह ट्रैक चीड़, बासा, भोज, बासा होते हुए गोमुख तपोवन तक जाता है। गोमुख से तपोवन 2.5 किमी का ट्रैक बहुत ही दुर्गम है, जिसमें 75 से 80 डिग्री के खड़े पहाड़ों को पार करना होता है।

पत्थर गिरते गए हम बढ़ते गए

एलआईसी के अधिकारी शुक्ला ने बताया कि यहां पर एडवेंचर ऐसा है कि एक तरफ कुआं और एक तरफ खाई है। यानी एक तरफ खाई में फिसलने का खतरा तो दूसरी तरफ पहाड़ों पर चढ़ते हुए ऊपर से गिरने वाले पत्थरों से खतरा। ऐसा कई बार हुआ जब चढ़ाई करते हुए हमारे ग्रुप के ऊपर पत्थर गिरने लगे। लेकिन हम बढ़ते गए। जबकि कई बार ऐसा लगा कि कहीं हम खाई में न समा जाएं। कई बार हम चोटिल होने से भी बचे। रास्ते में एक तरफ आकाश गंगा नदी थी, जिसे तेज धारा को दो बार क्रास करने का रोमांच हासिल किया। यह भी अपने आप में दुर्लभ क्षण था। 7 जून को सुबह शुरू हुई चढ़ाई की यात्रा को 10 जून को तपोवन में खत्म किया। यहां जीरो डिग्री तापमान और कड़कड़ाती ठंड में रात गुजारी। यहां कई वर्षों से तपस्या में लीन चित्रकूट के स्वामी मौनी बाबा से भी मिले। यहां कदम-कदम पर रोमांच था, जिसे सभी ने सुरक्षा उपकरणों के साथ पूरा किया।

ग्लेशियर पिघलने का दुख

शुक्ला ने बताया कि हम सभी ट्रेकर्स ग्लेशियर में ट्रैकिंग के लिए रोमांचित थे, लेकिन हम सभी को चार किलोमीटर का वो हिस्सा भी देखने को मिला, जो प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिग के कारण खत्म हो रहा था। इस पूरे इलाके में ग्लेशियर खत्म ही हो गया था। यहां सिर्फ बंजर पहाड़ ही नजर आ रहे थे।

यह लोग भी थे शामिल

गोमुख तपोवन पर जाने वालों में भोपाल के दवा व्यवसायी अजय वर्मा, साइक्लिस्ट अंकुर सक्सेना, एलआइसी के शिरीष दुबे, हरीश फुलवानी, सुरेंद्र सिंह यादव, सत्यम द्विवेदी, अविनाश डोंगरे, भगवान संगतानी भी मौजूद थे।