
Petrol-Diesel (Photo Source - Patrika)
Petrol-Diesel: पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर प्रशासन द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में अहम बदलाव किए गए हैं। नए निर्देशों के अनुसार अब कृषि कार्य, आपातकालीन सेवाओं, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और बैंकों जैसे संस्थानों को बिजली बैकअप के लिए उपयोग होने वाले जनरेटर हेतु केन में डीजल लेने की अनुमति दी गई है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल पंप संचालकों को अपने प्रतिष्ठान पर लगे सीसीटीवी कैमरों का कम से कम 48 घंटे का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। यदि प्रशासन या संबंधित विभाग द्वारा इसकी मांग की जाती है तो पंप संचालकों को यह रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की कालाबाजारी या अनियमितता पर नजर रखना है।
दरअसल, हाल ही में पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने कलेक्टर से एसओपी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। एसोसिएशन का कहना था कि जारी एसओपी में केन में पेट्रोलियम उत्पाद नहीं देने का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में सवाल यह था कि क्या कृषि कार्य करने वाले किसानों और विभिन्न शासकीय संस्थानों को भी जनरेटर के लिए डीजल नहीं दिया जाएगा। इस पर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आवश्यक सेवाओं और कृषि कार्य के लिए केन में डीजल देने की अनुमति प्रदान कर दी है। हालांकि इसके लिए संबंधित व्यक्ति या संस्था को पेट्रोल पंप पर वैध पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि जिन संस्थानों को जनरेटर के लिए डीजल की आवश्यकता है, वे अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से पहचान पत्र दिखाकर पेट्रोल पंप से डीजल प्राप्त कर सकते हैं। इससे आवश्यक सेवाओं का संचालन प्रभावित नहीं होगा और बिजली बैकअप की व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलती रहेगी।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे, जिससे कई जगह लंबी-लंबी कतारें देखने को मिली थीं। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पहले सख्त एसओपी जारी की थी, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।
वर्तमान समय में रबी फसलों की कटाई और थ्रेशिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। किसानों की हार्वेस्टर और अन्य कृषि मशीनें खेतों में ही खड़ी रहती हैं, जिन्हें पेट्रोल पंप तक लाना संभव नहीं होता। ऐसे में किसानों को कृषि कार्य के लिए केन या छोटे ड्रम में डीजल ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। किसानों की इसी व्यावहारिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एसओपी में संशोधन करते हुए उन्हें राहत प्रदान की है।
प्रशासन का कहना है कि नए संशोधित नियमों से एक ओर जहां किसानों और जरूरी सेवाओं को सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर निगरानी भी बनी रहेगी, जिससे किसी भी प्रकार की कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
Published on:
31 Mar 2026 11:37 am
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