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किसानों और नेताओं पर दर्ज केस वापस लेने की प्रक्रिया से सरकार संतुष्ट

- 371 मामलों में हजारों किसानों पर दर्ज हैं मुकदमे

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bhopal

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भोपाल। मंदसौर गोली काण्ड सहित अन्य मामलों में किसानों और अन्य लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने के मामले में शनिवार को मंत्रालय में अहम बैठक हुई। भाजपा सरकार में किसान आंदोलन के दौरान 371 मामलों में 50 हजार से अधिक लोगों पर मुकदमे दर्ज किए थे। इसमें ज्यादातर अज्ञात हैं। सरकार ने इन्हें राजनीतिक मामले मानते हुए वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है।

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने वादा किया था कि भाजपा शासनकाल में दर्ज राजनीतिक मामलों को वापस लिया जाएगा। कांग्रेस ने इसे वचन पत्र में भी शामिल किया था। पुलिस मुख्यालय ने किसानों और नेताओं से जुड़े प्रकरणों को राज्य सरकार को भेजा, अब इन्हीं मामलों की समीक्षा और इनके मामले वापस लेने की कवायद चल रही है। गृह मंत्री बाला बच्चन ने बताया कि भाजपा सरकार ने किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए थे।

मंदसौर में आंदोलन कर रहे किसानों पर तो सरकार ने गोली चलवाई और प्रकरण भी दर्ज किए। शिवराज सरकार के खिलाफ आंदोलन या धरना प्रदर्शन करने पर जो केस किसानों पर दर्ज किये गए वो सभी हम रद्द करने जा रहे हैं। ये सभी राजनीतिक द्वेष वश मुकदमे दर्ज किए थे। ऐसे ही मामलों को वापस लिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। गृहमंत्री ने बताया कि बहुत से अज्ञात लोगों के नाम से केस दर्ज है और कई निर्दोषों के खिलाफ मुक़दमे दर्ज कर दिए गए, इन सभी प्रकरणों की समीक्षा की गई।

कैबिनेट से मिल चुकी है हरीझंडी -

कांग्रेस सरकार बनने के साथ ही राजनीतिक मामलों को वापस लेने का निर्णय कैबिनेट में हो चुका है। इसके बाद सरकार ने मुकदमा वापस लेने की कार्यवाही शुरू की है। राजनेताओं पर सिर्फ ऐसे केस वापस होंगे, जो राजनीतिक आंदोलन एवं राजनीतिक द्वेष के चलते दर्ज कराए गए हैं। किसानों ऐसे मामले भी वापस होना है जिसमें बिजली कंपनी ने बिजली चोरी पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। बताय जाता है कि विधि विभाग ने मामलों की एक रिपेार्ट तैयार की है, जिसमें कहा गया है कि किसके मामले किस धारा के तहत वापस लिए जा सकते हैं।