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अब स्वतंत्रता सेनानियों की तरह जाने जाएंगे मीसाबंदी, मिलेंगी यह सभी सुविधाएं

अब स्वतंत्रता सेनानियों की तरह जाने जाएंगे मीसाबंदी, मिलेंगी यह सभी सुविधाएं

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अब स्वतंत्रता सेनानियों की तरह जाने जाएंगे मीसाबंदी, मिलेंगी यह सभी सुविधाएं

भोपालः देश में साल 1975 से करीब दो साल के लिए लगे आपातकाल के दौरान राजनीतिक और सामाजिक वजहों से जिन लोंगों पर मीसा लगाकर कैदखानों में डाला गया था, उन लोगो को अब प्रदेश सरकार स्वतंत्रता सेनानियों जैसे अधिकार देगी। इसके लिए सरकार ने मानसून सत्र के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा से सम्मान विधेयक पारित करा लिया है, जो राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद से लागू भी कर दिया जाएगा। विधेयक के प्रदेश में लागू होने के बाद आपातकाल में मीसा लगने वाले लोगों को आजीवन के लिए सम्मान निधि मिलना शुरु हो जाएगी। इस विधेयक के लागू होने के बाद सरकार के खजाने पर 40 करोड़ रुपए आर्थिक भार बढ़ेगा।

पक्ष-विपक्ष का अपना तर्क

वही, विधानसभा से तो इस विधेयक को अनुमति मिल चुकी है, लेकिन राज्यपाल की अनुमति मिलने से पहले इसे लेकर राजनीति भी शुरु हो गई है। जहां एक तरफ भाजपा सरकार के विधायक इसे एक सराहनीय कदम बता रहे हैं, वहीं, कांग्रेस इसे चुनावी समीकरण से जोड़ रही है, उसका आरोप है कि, चुनावी समय में भाजपा सिर्फ ऐसा करके इसका लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाते हुए कहा कि, प्रदेश सरकार अपने खास लोगों को इसका फायदा पहुंचाने के लिए यह विधेयक लाई है।

जानिए क्या है मीसा कानून

मीसा कानून को सबसे पहले साल 1971 में लागू किया गया था, जिसे आपातकाल घोषित होने के बाद कांग्रेस का विरोध करने वालों पर मीसा धारा लगाकर उन्हें बंद किया गया था, इसमें ज्यादातर पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता और सरकार के फैसले का विरोध करने वालों को जेल हुई थी। मीसा यानी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम में आपातकाल के दौरान कई संशोधन किए गए और इंदिरा गांधी की निरंकुश सरकार ने इसके जरिए अपने राजनीतिक विरोधियों चुप कराया था। इसके बाद जून 1975 में लगे आपातकाल में बड़ी तादाद में आए विरोधियों को कांग्रेस सरकार ने जेल में कैद कर दिया था। इसमें विपक्ष के कई नेता भी शामिल थे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद जैसे कई नेताओं पर मीसा लगी थी।