
गोविंदपुरा विधानसभा से भाजपा की कृष्णा गौर ने दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के रवींद्र साहू को लगभग एक लाख 6 हजार 333 वोट से पराजित किया है। 17 नवंबर को विधानसभा सीट क्रमांक 154 गोविंदपुरा में देर शाम तक मतदान के लिए केंद्रों पर लंबी लाइन लगी रही। यहां कुल 63.3 प्रतिशत मतदान हुआ।
राजधानी की गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर इस बार भी सभी की निगाहें लगी रही। यह विधानसभा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के दबदबे के लिए जानी जाती है और उनके निधन के बाद बहू कृष्णा गौर यहां से चुनाव लड़ रही। कांग्रेस ने इस बार रवींद्र साहू को अपना उम्मीदवार बनाया।
गोविंदपुरा सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है। 1967 में बनी इस सीट पर हालांकि पहली और दूसरी जीत कांग्रेस ने ही दर्ज कराई थी लेकिन इसके बाद यहां कांग्रेस को सफलता नहीं मिली। यहां 1980 में बाबूलाल गौर की एंट्री हुई थी और उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की। इसके बाद 2013 तक वे चुनाव जीतते रहे। बाद में उनकी बहू कृष्णा गौर यहां से चुनाव जीत रहीं हैं। इस प्रकार 43 साल से लगातार इस सीट पर दिवंगत पूर्व सीएम बाबूलाल गौर या उनकी बहू कृष्णा गौर चुनाव जीतते आई हैं। कृष्णा गौर एक बार फिर यहां से बीजेपी की प्रत्याशी हैं।
सीट का इतिहास
यह विस सीट 1967 में बनी थी। तब कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस प्रत्याशी केएल प्रधान एमपी विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद कांग्रेस 1972 के चुनाव में भी इसी सीट से जीत दर्ज की। पार्टी ने मोहनलाल अस्थाना को टिकट दिया और वह जीते। 1977 में इस सीट पर कांग्रेस की हार हुई।
इसके बाद से यहां कांग्रेस का उम्मीदवार सफलता हासिल नहीं कर सका।
1977 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनता पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण शर्मा विधायक बने थे। इसके बाद हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल गौर पहली बार चुनाव जीते। फिर तो गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर बाबूलाल गौर का कब्जा हो गया। वे लगातार 1980, 1985, 1990, 1993, 1998, 2003, 2008 और 2013 में चुनाव जीते।
सीट के समीकरण
इस सीट पर सामान्य व ओबीसी वोटर्स 75 प्रतिशत से भी ज्यादा हैं। 15 प्रतिशत एससी वोटर हैं। यहां केवल 3 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। 2018 में गोविंदपुरा विधानसभा में कुल 1.66 लाख से ज्यादा महिलाएं और 1.88 लाख से ज्यादा पुरुष वोटर्स थे।
गोविंदपुरा से भाजपा प्रत्याशी कृष्णा गौर की प्रॉपर्टी में इस बार दो करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है। इनके पास गहने भी सबसे ज्यादा हैं।
लगातार 10 बार से बाजी मार रही बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस ने स्थानीय प्रत्याशी का दांव खेला। कांग्रेस प्रत्याशी रविंद्र साहू को लोग झूमर वाला के नाम से भी जानते हैं। दरअसल उनका झूमर बनाने का पुश्तैनी कारोबार है। वे पिछड़ा वर्ग के हैं और कांग्रेस महासचिव के पद पर हैं। इधर कृष्णा गौर 2009 में भोपाल की महापौर बनी थी और 2018 में गोविंदपुरा सीट से विधायक चुनी गई थीं। वे मध्य प्रदेश यादव समाज की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
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Updated on:
03 Dec 2023 06:43 pm
Published on:
30 Oct 2023 04:28 pm
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