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फर्जीवाड़ा में टॉप पर, जाली दस्तावेजों से हथिया रहे सरकारी नौकरियां

3 साल में सामने आया चौंकानेवाला आंकड़ा  

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भोपाल. सरकारी नौकरी पाने के लिए लोग क्या—क्या जतन नहीं करते. नौकरियों के लिए रिश्वतखोरी तो आम बात है पर मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए एक और खेल चल रहा है. यहां लोग जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरियां हथिया रहे हैं. सरकार की जांच में 3 साल में ऐसे लोगों का चौंकानेवाला आंकड़ा सामने आया है. हालांकि सरकार ऐसे फर्जीवाड़ा पर लगाम लगाने की कवायद में भी जुटी हुई है.

प्रदेश में 936 लोगों ने जाली दस्तावेजों से पाई सरकारी नौकरी
राज्य में बीते तीन साल में ऐसे 936 लोग सामने आए हैं जिन्होंने जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की है और सरकारी योजनाओं का लाभ भी लिया है. सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़ा के ऐसे मामलों में प्रदेश की राजधानी भोपाल सबसे आगे है. यहां 327 लोगों ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों से नौकरियां हासिल की हैं.

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सरकारी विभागों में फर्जी जाति प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों से नौकरियां हासिल करनेवालों की संख्या के आधार पर प्रदेश में ग्वालियर दूसरे नंबर पर है. ग्वालियर में ऐसे 182 केसेस सामने आए हैं. निवाडी जैसा छोटा सा जिला इस तरह के केस में तीसरे नंबर पर है. फर्जी जाति प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों से प्रदेश सरकार की नौकरियां प्राप्त करनेवाले यहां करीब 80 लोग सामने आए हैं. सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़ा करनेवाले टॉप 5 जिलों में रतलाम और राजगढ भी शामिल हैं. इन दोनों जिलों में क्रमश: 52 और 51 केसेस सामने आए हैं.

हालांकि अब सरकार ने फर्जी दस्तावेजों और फर्जी जाति प्रमाणपत्रों से नौकरियां हथियानेवालों के खिलाफ मुहिम शुरु की है. इस तरह के जो भी मामले सामने आ रहे हैं, उनकी तत्काल जांचकर कार्रवाई करने का दावा किया जा रहा है. फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के मामले में सरकार ने राज्य स्तर पर छानबीन समिति बना रखी है. कलेक्टर और एसपी की रिपोर्ट के आधार पर छानबीन समिति निर्णय लेती है और सरकार इस समिति की अनुशंसा पर कार्रवाई करती है.