
भोपाल। खाद्य तेलों की कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठा रही है पर इनका अपेक्षित असर नहीं हो रहा है। केंद्र स्टाक लिमिट की अवधि पूरे वर्ष के लिए बढ़ा चुका है और देश के सुपर स्टोरों पर स्टाक की जांच करने के लिए छापे भी मारे गए हैं। इससे प्रदेश के व्यापारियों में घबराहट तो है पर तेल के दाम कम नहीं हो रहे। हालांकि एक सप्ताह में सोयाबीन के तेल मेें मामूली गिरावट हुई है पर मूंगफली के तेल के दाम बढ़ गए हैं।
खाद्य पदार्थों की महंगाई से जहां आमजन त्रस्त है वहीं सरकार भी इस पर काबू पाना चाहती है। खाने के तेल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अब साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन—एसईए भी आगे आया है। खाद्य तेलों के इस संगठन ने महंगाई का हवाला देते हुए अपने सदस्यों से तेल के दाम नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है। इसके लिए सदस्यों को बाकायदा चिट्ठी लिखी है।
वैसे सरकार की कार्रवाई का कुछ असर जरूर हुआ है. प्रदेश के सबसे प्रमुख तेल बाजार इंदौर में सोया तेल के बढ़ते दामों पर कु्छ अंकुश लगा है। यहां 7 दिनों में सोया तेल के दामों में करीब 10 रुपए प्रति दस किलो की कमी भी हुई है और भाव स्थिर से बने हुए हैं. इंदौर में शुक्रवार को सोया तेल 1490 रुपये प्रति दस किलो में बेचा गया। 31 मार्च को इंदौर में सोया तेल का भाव 1500 रुपये प्रति दस किलो था।
मूंगफली तेल में मांग अच्छी रहने से भाव ज्यादा बने हुए हैं। शुक्रवार को लूज इंदौर मूंगफली तेल 1610 से 1630 के भाव पर बिका वहीं लूज मुंबई मूंगफली तेल 1620 के दाम पर रहा. एक सप्ताह पहले इंदौर मूंगफली तेल 1600-1610 रुपए प्रति दस किलो के भाव पर था. हालांकि मुंबई मूंगफली तेल 1620 रुपए प्रति किलो के भाव पर ही बना हुआ है।
व्यापारियों के अनुसार मूंगफली तेल के भाव कम होने के अभी जरा भी आसार नहीं हैं। सरकार की कार्रवाई का प्रभाव सोयाबीन तेल के भाव पर पड़ सकता है लेकिन दाम ज्यादा कम नहीं होंगे.
Published on:
08 Apr 2022 05:28 pm
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