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गुप्त नवरात्र: इन छोटी-छोटी बातों से प्रसन्न हो जाती हैं देवी मां, भूलकर भी न करें ये गलती

छोटी-छोटी बातों से प्रसन्न हो जाती हैं देवी मां...

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Gupt Navratra

गुप्त नवरात्र 2018

भोपाल। सनातन धर्म में नवरात्र की बहुत महिमा मानी गई है। वैसे तो सामान्यत: दो ही नवरात्रों (शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्र) को खास माना जाता है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि इन दो नवरात्रों के सिवाय वर्ष में दो गुप्त नवरात्र भी होते हैं। जो अत्यधिक प्रभावशाली माने गए हैं।

इस 13 जुलाई से गुप्त नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं, जिसका समापन 21 जुलाई को होगा। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार गुप्त नवरात्र में मां भगवती की पूजा और तंत्र साधना करने से भक्तों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार देवी की साधना के लिए साल में चार नवरात्र आती हैं। जिसमें आषढ और माघ मास में मनाई जाने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र भी कहा जाता है।

पंडित शर्मा के अनुसार इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र शनि पुष्य संयोग में 13 जुलाई से शुरू होगी। उनके मुताबिक इस दौरान भक्तों द्वारा नौ दिनों तक मां भगवती के नौ रूपों की पूजा करने से कई संकट टलने के साथ ही मनोकामना भी पूर्ण होगी।

उनके अनुसार गुप्त नवरात्र में मुख्य रूप से तंत्र साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र में प्रदेश के कई देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और लाखों की संख्या में भक्त मां के दर्शन करते हैं।

पंडित शर्मा ने मुताबिक गुप्त नवरात्र के मौके जहां एक ओर हमें अच्छे कर्म करने चाहिए, वहीं कुछ काम इस दौरान पूर्ण रूप से वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि इन वर्जित कार्यों को करने से देवी मां नाराज हो जाती हैं।

ये हैं वर्जित कार्य...
- नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए। इस दौरान बच्चों का मुंडन करवाना शुभ होता है।

- नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए।

- अगर आप नवरात्रि में कलश स्थापना कर रहे हैं, माता की चौकी का आयोजन कर रहे हैं या अखंड ज्योति‍ जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर नहीं जाएं।

- इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और नॉन वेज बिल्कुल न खाएं।

- नौ दिन का व्रत रखने वालों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

- व्रत रखने वाले लोगों को बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

- व्रत रखने वालों को नौ दिन तक नींबू नहीं काटना चाहिए।

- व्रत में नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. खाने में कुट्टू का आटा, समारी के चावल, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल, आलू, मेवे, मूंगफली खा सकते हैं।

- विष्णु पुराण के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है।

ये करने से मिलता है अच्छा फल...
उन्होंने बताया कि गुप्त नवरात्र में जातक को राशि के अनुसार वस्तुओं का दान जरूर करना चाहिए। जिससे मां की कृपा उन पर बनी रहे। उनके मुताबिक इस दौरान मां दुर्गा की पूजा करने से शक्ति मिलने के साथ ही जीवन में हर पग पर सफलता प्राप्त करते हैं। इसके अलावा इस दौरान लोग सिद्धियां भी प्राप्त करते हैं।

पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि नवरात्र के मौके पर यदि हम तंत्र साधना नहीं भी कर पाते हैं तो भी यदि आप अपनी राशि अनुसार वस्तुओं का दान करते हैं, तो आपको इसका विशेष फल प्राप्त होगा।

राशि अनुसार करें ये दान...

1. मेष- गेहूं और गुड़ का दान करें,इसके अलावा अन्न और वस्त्र का भी गरीबों में दान कर सकते है।

2. वृष- स्टील के बर्तन,चावल और चीनी का दान करें।

3. मिथुन- गरीबों को वस्त्र दें। साथ ही गाय को पालक खिलाएं।

4. कर्क- धार्मिक पुस्तक का दान करें। एक ताबें के पात्र में लडडू भरकर हनुमान जी के मंदिर में रख आएं।

5. सिंह- तांबे की वस्तु का दान करें। गरीबों में अन्न बांटे।

6. कन्या- गरीबों को वस्त्र दें व उनमें खिचड़ी बाटें।

7. तुला- गरीबों को चावल का दान दें।

8. वृश्चिक- गरीबों को भोजन कराएं। रक्त दान करें।

9. धनु- धार्मिक पुस्तकें बांटे। अस्पताल में मरीजों को फल खिलाएं।

10. मकर- तिल का दान करने के अलावा गरीबों को भोजन कराएं।

11. कुंभ- तिल और तेल का दान शनि देव को प्रसन्न करेगा। इसके साथ ही गरीबों में भोजन का दान करें।

12. मीन- धार्मिक पुस्तकें बांटे। गेहूं और गुड़ का गरीबों में दान करें।

गुप्त नवरात्र: राशि अनुसार इन मंत्रों का करें जाप rashi mantras for gupt navratri...
जल्द ही गुप्त नवरात्रि आने वाली है। शारदेय और चैत्र के समान ही इसका भी महत्व है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस दौरान हर राशि वाले जातक को भी अपनी राशि के मंत्र से माता की पूजा करने से अच्छे फल की प्राप्ति होती है।

1. मेष राशि:
ॐ ह्रीं उमा देव्यै नम:। अथवा ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:।

2. वृष राशि:
ॐ क्रां क्रीं क्रूं कालिका देव्यै नम:।

3. मिथुन राशि:
ॐ दुं दुर्गायै नम:।

4. कर्क राशि:
ॐ ललिता देव्यै नम:।

5. सिंह राशि:
ॐ ऐं महासरस्वती देव्यै नम:।

6. कन्या राशि:
ॐ शूल धारिणी देव्यै नम:।

7. तुला राशि:
ॐ ह्रीं उमा महालक्ष्म्यै नम:।

8. वृश्चिक राशि:
ॐ शक्तिरुपायै नम:। या ॐ ह्रीं उमा काम्नख्यै नम:।

9. धनु राशि:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

10. मकर राशि:
ॐ पां पार्वती देव्यै नम:।

11. कुंभ राशि:
ॐ पां पार्वती देव्यै नम:।

12. मीन राशि:
ॐ श्रीं हीं श्रीं दुर्गा देव्यै नम:।